December 06, 2016

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इन 5 बातों से शक के घेरे में आया सिमी के 8 सदस्यों का “एनकाउंटर”

कांग्रेस, सीपीएम, एआईएमआईएम जैसी पार्टियों ने कथित सिमी सदस्यों की मुठभेड़ में मारे जाने की न्यायिक जांच की मांग की है।

भोपाल के बाहरी इलाके में ईंटखेडी गांव के पास मारे गए प्रतिबंधित संगठन सिमी के कथित सदस्य। (फोटो-ANI)

सोमवार (31 अक्टूबर) तड़के भोपाल के केंद्रीय कारागार से प्रतिबंधित संगठन सिमी के आठ कथित सदस्य जेल से फरार हो गए। जेल से भागे कथित सिमी सदस्यों पर आतंकवाद, बम धमाके करने, बम बनाने और दंगे में शामिल होने के मुकदमे चल रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपी जेल के सुरक्षा गार्ड रमाशंकर यादव की हत्या करके भागने में कामयाब रहे। सोमवार दोपहर को पुलिस ने जेल से करीब 15 किलोमीटर दूर एक गांव में सभी फरार आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया। लेकिन पुलिस के दावे पर कुछ ही देर में सवाल उठने शुरू हो गए। कांग्रेस, सीपीएम, एआईएमआईएम जैसी पार्टियों ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। आइए देखते हैं किन वजहों से इस मुठभेड़ पर सवाल उठ रहे हैं।

1- कथित वीडियो- मुठभेड़ की खबर आने के कुछ घंटे बाद ही सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर होने लगे। दावा किया गया कि ये वीडियो कथित सिमी सदस्यों के मुठभेड़ के हैं। इन वीडियो की सत्यता की अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन अगर ये वीडियो सही हैं तो इनसे मध्य प्रदेश पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे एक वीडियो में पांच कैदी हाथ उठाकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की कोशिश करते दिख रहे हैं। लेकिन बाद में इन सभी को मुठभेड़ में मारा गया बताया गया। ऐसे ही एक दूसरे वीडियो में एक घायल कैदी को एक पुलिसवाला गोली मारता दिख रहा है। ऐसे ही एक तीसरे वीडियो जिसके कथित तौर पर किसी ग्रामीण ने बनाया है, एक पुलिसवाला एक कैदी के शव पर गोली चलाता दिख रहा है।

भोपाल मुठभेड़ सामने आया कथित वीडियो-

2- घड़ी, जूते और बेल्ट- सभी कैदियों के मारे जाने के बाद मीडिया में जो तस्वीरें सामने आईं उनमें वो घड़ी, जूते और बेल्ट पहने दिख रहे हैं। एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा, “डेड बॉडी देखकर पता लगता है कि जेल से भागे कैदियों ने जूते, घड़ी और बेल्ट जैसी चीजें पहनी हुई हैं। वहीं, जब किसी भी आरोपी का ट्रायल होता है तो उसे जेल में ऐसी चीजें पहनने की इजाजत नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि जेल से फरार हुए इन लोगों ने ऐसे सामान पहने हुए थे जो उन्हें जेल में नहीं मिलते।” ओवैसी के इस सवाल को कोई भी यूं नहीं खारिज कर सकता। जेल और अदालती कार्यवाही से परिचित लोग जानते हैं कि जन कैदियों पर मुकदमा चल रहा हो उन्हें जेल में ये चीजें पहनने की इजाजत नहीं होती।

3- चम्मच और चाकू से बंदूक का मुकाबला- मध्य प्रदेश पुलिस और राज्य के गृह मंत्री ने दावा किया कि सभी कैदी जेल में खाने के लिए मलिने वाली प्लेटों और चम्मचों के सुरक्षा गार्ड का गला काटकर फरार हो गए। अभी तक पुलिस ने इस बात का जवाब नहीं दिया है कि मारे गए कैदियों के पास कोई हथियार था या नहीं। अगर कैदियों के पास जेल से भागते समय केवल प्लेट और चम्मच थीं तो कुछ ही घंटे में 10-15 किलोमीटर के दायरे में उन्होंने पुलिस पर हमला कैसे किया होगा?

4- आठों फरार कैदी एक ही वक्त एक ही जगह- पुलिस के मुठभेड़ के दावे पर सबसे ठोस सवाल यही है कि जेल से भागने के करीब सात-आठ घंटे बाद सभी कैदी महज 15 किलोमीटर दूर एक ही वक्त एक जगह क्यों मौजूद थे? सभी कैदियों को पता रहा होगा कि पुलिस और खुफिया एजेंसियां उनके पीछे पड़ी होगी और एक साथ रहने से वो आसानी से पहचाने और पकड़े जा सकते थे। फिर वो एक ही वक्त पर एक ही जगह मौजूद रहे!

5- सुरक्षित जेल से सिमी सदस्य फिर फरार– भोपाल केंद्रीय कारागार को राज्य की सबसे सुरक्षित जेल मानी जाती है और वहां चौबीसों घंटे इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की व्यवस्था है। फरार कैदियों पर आतंकवादी गतिविधियों, राजद्रोह और डकैती के आरोपों में मुकदमे चल रहे थे।उन पर ऐसे संगठन का सदस्य होने का आरोप था जो बरसों से प्रतिबंधित है। ऐसे में ये कैदी भागने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में कैसे सफल हो गए? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैदी चादरों से रस्सी का काम लेकर दीवार पर चढ़ गए और जेल से भाग गए। कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया है कि मध्य प्रदेश की जेलों से केवल सिमी के सदस्य होने के आरोपी ही जेल से क्यों फरार होते हैं? सिंह ने 2013 में राज्य की खंडवा जेल से फरार होने की याद दिलाते हुए मामले पर शंका जाहिर की। खंडवा जेल से फरार चारों सिमी सदस्यों को  2016 में ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था।

वीडियो: भोपाल जेल से फरार कैदी कथित मुठभेड़ में मारे गए-

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First Published on November 1, 2016 10:07 am

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