March 27, 2017

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दशहरे पर बंदूक चलाते एसपी और महिला डीएम का वीडियो आया सामने, PM से की गई शिकायत

भोपाल के आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने पीएमओ से इस घटना के बारे में टि्वटर पर शिकायत की।

फायरिंग करतीं डीएम स्वाति मीणा।

मध्यप्रदेश के खंडवा में जिला कलक्टर और एसपी द्वारा विजयादशमी के दिन पुलिस लाइन में फायरिंग करने का मामला सामने आया है। न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा जारी किए गए वीडियो में एसपी महेंद्र सिंह और कलक्टर स्वाति मीणा फायरिंग करती नजर आ रही हैं। एसपी सिंह ने हवा में चार फायरिंग की तो वहीं कलक्टर मीणा ने एक फायरिंग की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस लाइन में हथियारों की पूजा भी की गई है। फायरिंग पूजा के बाद ही की गई है। स्वाति मीणा की जिला कलक्टर के रूप में स्वाति की पहली पोस्टिंग मंडला में हुई थी। इसके बाद उनका ट्रांसफर खंडवा में कर दिया गया। इसके बाद भोपाल के आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने पीएमओ से इस घटना के बारे में टि्वटर पर शिकायत की। दुबे के इस ट्वीट में पीएमओ के अलावा सीएमओ और एचएमओ भी टैग हैं।

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इनाडू ने अजय दुबे के हवाले से लिखा है, ‘कलेक्टर द्वारा खुलेआम फायरिंग करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। हर जिले में पुलिस का शस्त्रागार होता है और उसके शस्त्रों का उपयोग पुलिस का अधिकार है। भारत सरकार ने कलेक्टर को लॉ एंड आर्डर की स्थिति में फायरिंग कराने के आदेश दिए हैं, लेकिन ये आदेश कलेक्टर पुलिस को जारी करता है और न कि कलेक्टर फायरिंग करता हैं। भारत सरकार आईएएस अधिकारियों को कोई शस्त्र भी उपलब्ध नहीं कराती है। ऐसे में किसी दूसरे के शस्त्र का उपयोग करने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। खंडवा कलेक्टर ने राइफल से फायरिंग के अलावा स्वचलित गन से फायरिंग की, यह भी गैरकानूनी है।’

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अजय दूबे के ट्वीट का प्रिंट स्क्रीन। अजय दूबे के ट्वीट का प्रिंट स्क्रीन।

बता दें, हिंदू मक्कल काच्छी संगठन के नेता अर्जुन संपत पर भी अपने घर में शस्त्र पूजा करने और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर मामला दर्ज किया गया था। संपत के खिलाफ सेक्शन 153(ए) और 25(ए) के तहत समुदायों में दुश्मनी फैलाने का केस दर्ज किया गया। कुछ राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संस्थानों ने पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर संपत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। उनका कहना था कि इससे समाज में अशांति फैल सकती है। साथ ही कहा गया है कि यह भी जांचा जाए कि क्या उनके पास हथियारों का वैध लाइसेंस है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर संपत ने कहा था कि वे बंदूकें नहीं थी, बल्कि उनके बेटे के खिलौने थे। साथ ही कहा कि जो धातु के हथियार थे वे उन्हें स्मृति चिन्ह के तौर पर गिफ्ट किए गए थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है। शुरुआती जांच में पाया है कि बंदूकें उनके पर्सनल सिक्यूरिटी ऑफिसर की थीं।

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First Published on October 14, 2016 7:16 pm

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