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मधुमिता शुक्ला हत्या के दोषी अमरमणि त्रिपाठी के बेटे को सपा ने दिया विधान सभा का टिकट

यूपी के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को मधुमिता शुक्ला की हत्या के लिए अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अमरमणि त्रिपाठी की फाइल फोटो (ap)

मधुमिता शुक्ला हत्या के दोषी और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी को समाजवादी पार्टी ने सूबे में 2017 में होने वाले विधान सभा चुनावों में प्रत्याशी बनाया है। अमनमणि यूपी की नौतनवा विधान सभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। अमरमणि यूपी से चार बार विधायक रह चुके हैं। अमरमणि और उनकी पत्नी मधुमणि फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी पत्नी भी 2003 में हुई मधुमिता शुक्ला की हत्या की दोषी हैं। 24 वर्षीय मधुमिता शुक्ला की 9 मई 2003 को दो बंदूकधारियों ने लखनऊ स्थित उनके आवास पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। मधुमिता शुक्ला की हत्या के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्टे से पता चला था कि वो गर्भवती थीं। अदालत के आदेश के बाद किए गए डीएनए टेस्ट से बच्चे के अमरमणि त्रिपाठी के होने की पुष्टि हुई थी। अमरमणि को 2007 में मामले में दोषी पाने के बाद अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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अमरमणि के बेटे अमनमणि को भी उनकी पत्नी सारा की मौत होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। अमनमणि ने सारा से 2013 में अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। जुलाई 2015 में सारा की एक संदिग्ध कार दुर्घटना में मौत हो गई। समाजवादी पार्टी ने 2012 के विधान सभा चुनाव में भी अमनमणि त्रिपाठी को नौतनवा से विधान सभा का टिकट दिया था। अमरमणि ने बेटे के समर्थन में जेल से वीडियो संदेश भी भिजवाया था लेकिन अमनमणि कांग्रेस के प्रत्याशी कौशल किशोर से हार गए थे।

अमनमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी सारा की फाइल फोटो। अमनमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी सारा की फाइल फोटो।

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनावों की तैयारी सभी दल शुरू कर चुके हैं। चुनाव से पहले सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रही सत्ता की जंग खुलकर सामने आ गई थी। मुलायम अपने भाई शिवपाल यादव को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया तो उनके बेटे और सूबे के सीएम अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल से सभी अहम मंत्रालय छीन लिए। अखिलेश के विरोध में शिवपाल ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया जिसे स्वीकार नहीं किया गया। बाद में समझौते के तहत शिवपाल को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और अखिलेश को पार्टी की संसदीय समिति का प्रमुख बनाया गया।

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