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यूपी: 10 में से 9 बच्चों को नहीं मिलता पर्याप्त मात्रा में आहार

चाइल्ड राइट्स एवं यू संगठन द्वारा किए गए शोध के अनुसार प्रदेश में 5.3 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिन्हें पर्याप्त मात्रा में आहार नहीं मिला पा रहा है।
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (Express File Photo)

उत्तर प्रदेश में 6 से 23 उम्र के बच्चों को पर्याप्त आहार नहीं मिल पाता है। यह शोध नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे द्वारा करवाया गया, जिसमें पाया कि प्रदेश में 10 में से 9 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें पर्याप्त मात्रा में आहार नहीं मिल पाता। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की जांच के लिए हुए शोध में सामने आया कि नेशनल स्टेंडर्ड के मुकाबले प्रदेश इस मामले में सबसे नीचले स्थान पर है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ने एक दशक पहले भी सर्वे कराया था जिसमे स्थिति में सुधार दिखाया गया था। चाइल्ड राइट्स एवं यू संगठन द्वारा किए गए शोध के अनुसार प्रदेश में 5.3 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि पर्याप्त आहार नहीं लेते।

देश में उत्तर प्रदेश का स्थान इस मामले में सबसे नीचे है, जब्कि इसके मुकाबले तमिलनाडू बहुत सही है। तमिलनाडू में ऐसे बच्चों की संख्या 31 प्रतिशत है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 4 में से 3 बच्चे प्रदेश में ऐसे हैं जिन्हें जन्म के एक घंटे के अंदर पहला दूध मां का नहीं पिलाया जाता है। कुपोषण की बीमारी शुरुआती सालों में ही मां के स्वास्थ्य से जुड़ जाती है। बच्चे के जन्म से पहले और बाद में यदि मां के पोषटिक आहार का ध्यान नहीं रखा जाता तो इसका असर बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

प्रदेश में केवल 6 प्रतिशत ही ऐसी महिलाएं है जो कि बच्चे के जन्म से पहले  खाने-पीने का अच्छे से ध्यान रखती हैं। 13 प्रतिशत महिलाएं केवल 100 दिनों  के लिए आयरन और फौलिक एसिड वाली चीजें लेती हैं। प्रदेश में एक तिहाई  हिस्सा ऐसा भी है जहां पर घर में ही बच्चों को जन्म दिया जाता है। नेशनल  फैमिली हेल्थ सर्वे ने तीन ऐसे आंकड़े निकाले हैं जो कि बच्चों के कुपोषित होने के संकेत को बयां करता है। इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिनकी लम्बाई उम्र के अनुसार कम होती है, जिनका लम्बाई के अनुसार वजन कम होता है और  जिनका वजन उम्र के हिसाब से कम होता है।

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