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लखनऊ की ईदगाह में पहली बार पुरुषों के साथ ईद की नमाज अदा करेंगी महिलाएं

गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों-इबादतगाहों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर छिड़ी बहस के बीच मुसलिम महिलाओं के हक की आवाज बुलंद करने वाली संस्थाओं ने ईदगाह में नमाज पढ़ने का इरादा जताया था।
Author लखनऊ | July 7, 2016 01:37 am
नमाज अदा करतीं मुस्लिम महिलाएं।

इबादत के हक को लेकर देश भर में महिलाओं की उठी आवाज का असर उत्तर प्रदेश की राजधानी में भी देखने को मिला है। हिंदू महिलाओं को कई धर्मस्थलों में प्रवेश का अधिकार मिलने से लखनऊ की मुसलिम महिलाएं इस कदर प्रेरित हुईं कि पहली बार वे बड़े उत्साह से ईदगाह में नमाज का फर्ज अदा करने जा रही हैं। यहां ईद गुरुवार को है और शहर में अमन-चैन के लिए पक्के इंतजाम किए गए हैं।

गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों-इबादतगाहों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर छिड़ी बहस के बीच मुसलिम महिलाओं के हक की आवाज बुलंद करने वाली संस्थाओं ने ईदगाह में नमाज पढ़ने का इरादा जताया था। उनकी इस मांग के आगे मौलानाओं को झुकना पड़ा और अब लखनऊ स्थित ऐशबाग ईदगाह में पहली बार औरतों के ईद की नमाज अदा करने के लिए अलग से इंतजाम किया गया है।

ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बुधवार को बताया कि इस बार ऐशबाग ईदगाह में औरतों के लिए ईद की नमाज का खास इंतजाम किया गया है। ऐसा पहली बार किया गया है। ईदगाह में पुरुषों के साथ-साथ पहली बार बड़ी संख्या में महिलाएं भी ईद की नमाज अदा कर सकेंगी। उन्होंने बताया कि ईदगाह के दरवाजे पहले भी महिलाओं के लिए बंद नहीं थे, लेकिन पूर्व में उनके लिए नमाज का अलग इंतजाम नहीं किया जाता था। इस बार विशेष प्रबंध की वजह से बड़ी संख्या में महिलाएं ईदगाह में नमाज पढ़ सकेंगी।

ईदगाह प्रबंध कमेटी का यह फैसला ऐसे वक्त में खासा महत्त्वपूर्ण है, जब देश में धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के जाने को लेकर बहस-मुबाहिसे का दौर जारी है। महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ आंदोलन के बाद वहां सदियों पुरानी परंपरा टूटी है और अप्रैल माह में पहली बार महिलाओं को भी मंदिर में दाखिल होने की इजाजत दी गई है। वैसे, मजारों पर महिलाओं के जाने को लेकर ज्यादातर जगहों पर कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन आमतौर पर उन्हें मस्जिद या ईदगाह में नमाज अदा करते बहुत कम ही देखा जाता है। ऐशबाग ईदगाह में महिलाओं के लिए अलग इंतजाम की परंपरा एक प्रगतिशील कदम कहा जा सकता है।

ध्यान रहे कि तृप्ति देसाई के आंदोलन से प्रेरित होकर ही भारतीय मुसलिम महिला आंदोलन नामक संगठन ने मुंबई हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर हाजी अली दरगाह सहित पांबदी वाली इबादतगाहों में औरतों के प्रवेश की मांग उठाई है। इस बीच आल इंडिया मुसलिम महिला पर्सनल बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने महिलाओं के ईदगाह में नमाज अदा करने की तारीखी पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि देर से लिया गया यह फैसला महिलाओं को उनके अधिकार के लिए उत्साहित करेगा। राष्ट्रीय महिलाआयोग की पूर्व सदस्य शमीना शफीक ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इस दौर में जब महिलाओं को मुख्यधारा में लाने की पहल चल रही है, यह फैसला एक नजीर बनेगा। उन्होंने इस पहलकदमी के लिएईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का आभार जताया।

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