December 05, 2016

ताज़ा खबर

 

खजुराहो के पर्यटन व्यवसाय पर मार, LOC पर तनाव के माहौल से घट रही टूरिस्टों की संख्या

पर्यटक नगरी खजुराहो पहले से ही मंदी की मार से जूझ रही थी। इस बार लक्षित हमले और सीमा पर तनाव ने यहां के पर्यटन व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

Author छतरपुर | October 28, 2016 00:51 am

पर्यटक नगरी खजुराहो पहले से ही मंदी की मार से जूझ रही थी। इस बार लक्षित हमले और सीमा पर तनाव ने यहां के पर्यटन व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। विदेशी पर्यटकों की अपेक्षा से कम आवक ने यहां के कारोबारियों को चिंताग्रस्त कर दिया है। लक्षित हमले के बाद पाक सीमा पर तनाव से सबसे अधिक पर्यटन व्यवसाय पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है। विश्व पर्यटक नगरी खजुराहो में तो इसका सीधा असर देखा जा रहा है। खजुराहो में मौसम की ठंडक के साथ ही पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है। खासकर विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगती है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को उम्मीद थी कि एक अरसे के बाद खजुराहो मंदी की मार से मुक्त होगा। इस बार लक्षित हमले के बाद सीमा पर तनाव के हालात ने चिंता की लकीरें खीच दी हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े विक्की नागर बताते हैं कि विदेश से आने वाले कई ग्रुपों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी है। हालांकि, ट्रेवल्स कारोबार से जुड़े कपिल सिंह के अनुसार उनके कारोबार पर कोई असर नहीं है। पर वे स्वीकारते हैं कि यह चर्चा है कि कई ग्रुप अब नहीं आ रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि विदेशी पर्यटक एक पैकेज के तहत भारत में आते हैं। जिसकी पहली पंसद घाटी का इलाका होता है। उसके बाद वह आगरा आना पंसद करता है।

 

पिछले कुछ वर्षों में खजुराहो की ओर विदेशी पर्यटकों का झुकाव कम हुआ है। आंकड़े गवाह हैं कि खजुराहो आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या प्रतिवर्ष घटती जा रही है। पिछले वर्ष यहां 65034 विदेशी पर्यटक आए। 2012 से गौर किया जाए तो तब 97724 विदेशी और 260946 देशी पर्यटकों ने खजुराहो के मंदिरों का भ्रमण किया था। 2013 में देशी पर्यटकों की संख्या तो 276434 पंहुच गई। लेकिन विदेशी पर्यटकों की संख्या 89511 रह गई। इसी तरह 2014 में विदेशी पर्यटकों संख्या फिर घट कर 74706 पर आ गई। 2015 में तो विदेशी पर्यटकों ने बड़ा झटका दिया और इनकी संख्या घट कर 65034 पर रह गई। हालांकि, देशी पर्यटकों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है।

पर्यटन उद्योग को आर्थिक ताकत देने के लिए मुख्यतय: विदेशी पर्यटकों की भूमिका अहम होती है। अब खजुराहो के व्यवसायी सबसे बुरे दिन से गुजर रहे हैं। खजुराहो के विकास के नाम पर अरबो रुपए खर्च किए जा चुके हैं। पहुंच मार्ग सहित अन्य सुविधाओं का आज भी अभाव है। इसके अलावा पर्यटन व्यवसाय को वृहत रूप देने के लिए आसपास के स्थलों को विकसित नहीं किया गया। जिससे मंदिरों सहित अन्य पर्यटन स्थलों के विकास की दम पर यहां पर्यटकों को रोका जा सके। वहीं पश्चिमी मंदिर समूह को जोड़ने वाली मुख्य सड़क को छोड़ अंदर झांका जाए तो खजुराहो का असली रंग बदरंग नजर आता है। जबकि खजुराहो के दिन पलटने का दावा किया गया था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 28, 2016 12:38 am

सबरंग