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हिंदू-मुस्लिम एकता पर लिखा तो मिली धमकी- मुसलमान बनो या अंजाम भुगतो

धर्म के मामलों पर बोलने के लिए केरल में दो अलग-अलग लोगों को धमकियां मिल रही हैं।
Author July 22, 2017 12:51 pm
मलयालम के लेखक केपी रमनउन्नी।

धर्म के मामलों पर बोलने के लिए केरल में दो अलग-अलग लोगों को धमकियां मिल रही हैं। इसमें से एक मलयालम के लेखक हैं जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता पर कुछ आर्टिकल लिखे। अब उनसे कहा जा रहा कि वह इस्लाम कबूल लें या फिर अंजाम भुगतने को तैयार रहें। दूसरी एक महिला है जिन्होंने मशहूर चित्रकार एम एफ हुसैन की सरस्वती वाली विवादित पेंटिंग को जायज ठहराया था। अब उन्हें सोशल मीडिया पर एसिड अटैक तक की धमकियां मिल रही हैं। फिलहाल पुलिस ने दोनों ही मामलों को दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

हिंदू मुस्लिम एकता पर लिखने वाले लेखक का नाम केपी रमनउन्नी है। उन्हें धमकी भरा एक पत्र मिला जिसमें लिखा है, ‘हम तुम्हें छह महीने का वक्त दे रहे हैं, इस्लाम अपना लो, वर्ना तुम लंबे वक्त तक छिपे नहीं रह पाओगे इसलिए जल्दी पांच वक्त की नमाज पढ़नी और रोजा रखने के लिए तैयार हो जाओ। वर्ना तुम्हें वही सजा मिलेगी जो कि इस्लाम को ना मानने वाले को दी जाती है। तुम्हारे लेख पढ़कर लोग भटक गए हैं।’

रमनउन्नी कोझिकोड में रहते हैं। रमजान के दिनों में उन्होंने कुछ लेख लिखे थे। लिखा था कि हिंदू मुसलमान के दुश्मन नहीं हैं। रमनउन्नी को समझ नहीं आ रहा कि रमजान के दिनों में उनके आर्टिकल की इतनी तारीफ हो रही थी लेकिन अब अचानक ऐसे कैसे हो गया। रमनउन्नी को प्रोफेसर टी जी जोसफ की तरह अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई। 2010 में कथित रूप से मोहम्मद का अपमान करने के लिए प्रोफेसर जोसफ का सीधा हाथ काट दिया गया था।

जोसफ का उदाहरण केरल की वर्मा कॉलेज की प्रोफेसर दीपा निसांथ को भी दिया गया है। उन्होंने छात्र संगठन एसएफआई के उस पोस्टर का समर्थन किया था जिसमें एमएफ हुसैन की सरस्वती वाली पेंटिंग का इस्तेमाल किया गया था। हिंदूवादी संगठन उस पेंटिंग पर भड़क गए थे। उनके मुताबिक, सरस्वती को नग्न अवस्था में दिखाकर हुसैन ने हिंदू धर्म का अपमान किया। दीपा के मुताबिक, फोटोशॉप की हुई उनकी तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर डाली जा रही हैं। साथ ही ‘पेंटिंग की मॉडल इसको होना चाहिए था’ जैसे कमेंट किए जा रहे हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का कहना है कि सरकार इन मामलों से गंभीरता से निपटेगी। विजयन ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि लेखकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ता के साथ ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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