December 11, 2016

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केरल: मेडिकल कॉलेज ने लड़कियों को जींस पहनने से रोका, कहा- शोर करने वाले गहने न पहनें

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब राज्‍य के किसी कॉलेज में 'ड्रेस कोड' लागू किया गया हो।

Author October 21, 2016 16:43 pm
केरल का सरकारी मेडिकल कॉलेज। (Photo: Adnan Haleem/Wikimedia)

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज ने छात्राओं पर ड्रेस कोड थोप दिया है। कॉलेज ने लड़कियों से कहा है कि वह जींस, लेगिंग्‍स या ‘शोर करने वाले आभूषण’ पहनकर न आएं। गुरुवार को जारी किए गए सर्कुलर में कॉलेज के उप-प्रधानाचार्य ने एमबीबीएस कोर्स के सिलसिले में कुछ नियम बताए हैं, ताकि अटेंडेंस और फाइनल इंटर्नल मार्क्‍स सुनिश्चित किए जा सकें। इस सर्कुलर के आखिर में लड़के-लड़कियों, दोनों से फार्मली ड्रेस होने और ‘क्‍या करें’ और ‘क्‍या न करें’ की लिस्‍ट दी गई है। जहां लड़कों को ‘साफ-सुथरे कपड़े और फॉर्मल ड्रेस व जूते’ पहनने को कहा है। वहीं महिलाओं को फार्मल्‍स पहनने को जिसमें खासतौर पर ‘चूड़ीदार या साड़ी’ का जिक्र किया गया है और उनके बाल ‘बंधे हुए’ होने च‍ाहिए। सर्कुलर में लड़कियों को ‘जींस, लेगिंग्‍स या शोर करने वाले आभूषण’ पहनने पर भी रोका गया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब राज्‍य के किसी कॉलेज में ‘ड्रेस कोड’ लागू किया गया हो। इसी साल, कोझीकोड़ के लिए कॉलेज ने कैंपस में लड़कियों के जींस पहनने पर प्रतिबंध लगाया था। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाली लड़कियों ने शिकायत की है कि साड़ी पहनने पर उन्‍हें बाकी काम करने में दिक्‍कत होती है, साथ ही दुपट्टे का ध्‍यान रखना भी मुश्किल होता है।

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इससे पहले, 17 अक्‍टूबर को कोझिकोड़ के सलाफी (कट्टर इस्लाम का संदेश देने वाला) धर्मोपदेशक ने मुस्लिम अभिभावकों से अपने बच्चों को मुख्यधारा के स्कूलों में नहीं भेजने के लिए कहा है। इस सलाफी धर्मोपदेशक का कहना है कि मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ने से मुस्लिम बच्चे इस्लाम और अल्लाह से दूर हो जाते हैं और काफिर बन जाते हैं। इस धर्मोपदेशक ने मुस्लिम अभिभावकों से बच्चों को अपने घर में ही इस्लामिक तौर तरीकों से शिक्षा देने की सलाह दी है।

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वहीं, 19 अक्‍टूबर को केरल के एक स्‍कूल ने नियम जारी कर कहा कि बच्चों को टीचरों और सीनियर अथॉरिटीज को हाथ जोड़कर हरि ओम (Hari Om) कहकर नमस्कार करना होगा।

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First Published on October 21, 2016 4:43 pm

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