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कश्‍मीर की तरह कर्नाटक सरकार ने भी मांगा अलग झंडा, भड़की श‍िवसेना

ऐसी राज्य सरकार को तुरंत ही भंग कर देना चाहिए और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।
Author बेंगलुरु | July 18, 2017 17:36 pm
शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत (File Photo)

जम्मू-कश्मीर के तर्ज पर अब कर्नाटक सरकार भी अपने राज्य के लिए अलग झंडे की मांग कर रहा है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। इस मांग के बाद अन्य राजनीतिक पार्टियों को कांग्रेस को घेरने के लिए एक नया मुद्दा मिल गया है। बीजेपी और शिवसेना ने इस विषय को उठाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य के लिए अलग झंडे की मांग करना संविधान के खिलाफ है। ऐसी राज्य सरकार को तुरंत ही भंग कर देना चाहिए और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।

आपको बता दें कि कांग्रेस के नेतृत्व सिद्धारमैया वाली सरकार ने 9 लोगों की एक कमेटी तैयार की है जो झंडे का डिजाइन तैयार करेगी। इसके अलावा इस कमेटी को नए झंडे के लिए कानूनी दांवपेच की रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। बता दें कि अभी तक सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए ही अलग झंडा की अनुमति मिली हुई है। राज्य में इससे पहले कर्नाटक डे मनाए जाने के दौरान भी अलग प्रकार का झंडा देखा जाता रहा है। वह झंडा पीले और लाल रंग का हुआ करता था। लेकिन अब इस झंडे को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की जा रही है।

सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि क्या देश के संविधान में ऐसा कोई भी नियम है जिसमें राज्य के पास खुद का झंडा होना अपराध बताया गया हो? उन्होंने कहा कि इस कदम का चुनाव से कोई लेना देना नहीं है। अगर भाजपा इसके खिलाफ है तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए। झंडे की मांग का यह कदम राज्य में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले देखने को मिला है। हालांकि 2012 में जब राज्य में भाजपा की सरकार थी तब भी अलग झंडे की मांग उठी थी लेकिन उस समय राज्य सरकार ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा था कि सरकार लाल और पीले रंग के कन्नड झंडे को आधिकारिक झंडा घोषित नहीं करेगी क्योंकि अलग झंडा होना देश की एकता और अखंडता के खिलाफ होगा। विधानसभा में तत्कालीन मंत्री गोविंद कारजोल ने कहा था कि यदि राज्यों के अपने अलग झंडे होंगे तो इससे राष्ट्रीय ध्वज का महत्त्व खत्म हो जायेगा। इसके साथ यह प्रांतवाद की भावनाओं को भी भड़का सकता है।

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