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एंबुलेंस ना मिलने पर बेटी को मोपेड पर लेकर घूमता रहा शख्‍स, इलाज के अभाव में टूट गया दम

सुबह के करीब 4 बजे थे कि रतनम्मा की तबियत ज्यादा खराब हो गई और हमने फिर से मधुगिरी के अस्पताल में एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन पहले की ही तरह इस बार भी एंबुलेंस नहीं आई।
Author बेंगलुरू | February 21, 2017 13:40 pm
अगर पहली बार में ही अस्पताल द्वारा एंबुलेंस दे दी गई होती तो आज एक बेटी अपने पिता के साथ होती।

कर्नाटक में समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण 20 वर्षीय लड़की ने दम तोड़ दिया। लड़की के मरने के बाद उसका पिता अस्पताल से उसे अपनी साइकिल पर ही घर लाया क्योंकि उसे पता था कि उसे एंबुलेंस नहीं मिलेगी। बेंगलुरु से 150 कि.मी दूर वीरापुरा की रहने वाली टी रतनम्मा को बुखार और सर्दी की शिकायत थी। बेटी के इलाज के लिए उसके पिता डी थिम्मप्पा उसे घर से 6 कि.मी दूर मधुगिरी के कोड़ीगेनाहल्ली स्थित प्राथमिकी चिकित्सा केंद्र अपनी मोपेड पर बैठाकर ले गए। वहां पर डॉक्टर ने रतनम्मा को कुछ दवाइयां देकर घर भेज दिया।

रात को रतनम्मा ने अपने पिता से कहा कि वह ठीक महसूस नहीं कर रही है। इसके बाद रतनम्मा को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उसके पिता ने मधुगिरी के अस्पताल में एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। जिसके बाद वे रतनम्मा को 21 कि. मी दूर कोड़ीगेनाहल्ली के एक प्राइवेट क्लीनिक में दिखाने के लिए ले गए जहां पर डॉक्टर राजू ने उसे तीन इंजेक्शन और दवाइयां दीं। रतनम्मा के पिता ने बताया कि करीब 11 बजे वे रतनम्मा को लेकर घर वापस आए। उन्होंने बताया कि पूरी राज रतनम्मा सो नहीं पाई और सुबह-सुबह हमने देखा कि वह कांप रही है और वह ठीक तरह से सांस भी नहीं ले पा रही है।

उन्होंने कहा कि सुबह के करीब 4 बजे थे कि रतनम्मा की तबियत ज्यादा खराब हो गई और हमने फिर से मधुगिरी के अस्पताल में एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन पहले की ही तरह इस बार भी एंबुलेंस नहीं आई। एंबुलेंस नहीं आई तो हम करीब 8 बजे अपनी मोपेड पर रतनम्मा को कोड़ीगेनाहल्ली के चिकित्सा केंद्र ले गए। उन्होंने बताया कि मोपेड पर रतनम्मा को उसके भाई ने पकड़ रखा था। हम जैसे ही चिकित्सा केंद्र पहुंचे तो डॉक्टरों ने कहा कि रतनम्मा को मधुगिरी के बड़े अस्पताल में भर्ती करना होगा क्योंकि उसकी हालत ज्यादा गंभीर है। इसके बाद उन्होंने कहा कि हमें पता था रतनम्मा को अस्पताल ले जाने के लिए हमें एंबुलेंस नहीं मिलेगा तो हम रतनम्मा को वापस मोपेड पर बैठा कर डॉक्टर राजू के पास ले गए जहां पर उन्होंने मेरी बेटी को मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों की पोल खुल गई है। अस्पताल की लापरवाही के कारण एक मासूम जिंदगी अपने परिवार से छिन गई। अगर पहली बार में ही अस्पताल द्वारा एंबुलेंस दे दी गई होती तो आज एक बेटी अपने पिता के साथ होती।

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