April 28, 2017

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10 साल की थी, तब निगल लिया था पेन का कैप, 9 साल बाद डॉक्‍टरों ने ऑपरेशन कर फेफड़ों से निकाला

रेनुका का ऑपरेशन करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर शशिधर बुग्गी ने बताया कि रेनुका के फेफड़ो में संक्रमण फैल गया था।

Author बेंगलुरू | March 31, 2017 14:09 pm
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (FiLE PHOTO)

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक अलग ही मामला सामने आया है जहां पर डॉक्टरों ने एक लड़की की खांसी का इलाज किया तो उसके फेफड़ो से पेन का कैप निकाला। पिछले 9 सालों से कोप्पल निवासी 19 वर्षीय रेनुका खांसी से बहुत परेशान थी। उसके माता-पिता ने उसे कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उसकी खांसी ठीक नहीं हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इतने साल बीत जाने के बाद खांसी की इस बीमारी की वजह से रेनुका को सांस लेने में समस्या आई। जिसके बाद उसे राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डीज़ीज़ में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने रेनुका ऑपरेशन किया तो उन्हें उसके फेफड़ों में पेन का ढक्कन मिला।

रेनुका का ऑपरेशन करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर शशिधर बुग्गी ने बताया कि रेनुका के फेफड़ो में संक्रमण फैल गया था। हमने एक्सरे किया तो उसमें एक काला धब्बा नजर आ रहा था। हमने इस धब्बे को हटाने के लिए रेनुका की एंडोस्कॉपी की लेकिन वह नहीं निकला। जिसके बाद हमने ऑपरेशन कर इस समस्या को दूर करने का फैसला किया। रेनुका का ऑपरेशन किया तो उन्होंने पाया कि फेफड़ों में पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। फेफड़ो में फंसा यह कैप सिकुड़ता जा रहा था। इसी के चलते रेनुका को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी।

रेनुका के माता-पिता पेशे से मजदूर हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र के हर एक डॉक्टर से रेनुका का इलाज कराया लेकिन कोई उसकी खांसी की जड़ को पहचान नहीं पाया। वह जहां कहीं भी जाती डॉक्टर उसे खांसी की दवा दे देते थे लेकिन वे इसके पीछे की समस्या नहीं समझ पाए। जब रेनुका तीसरी कक्षा में थी, तब खेलते समय उसने ढक्कन खा लिया था। डॉक्टरों का कहना है कि अब रेनुका में सुधार है लेकिन अभी उसे कुछ और दिनों तक अस्पताल में रहना होगा। इस तरह की लापरवाही के कारण कई बार लोगों को पुरानी खांसी के कारण ट्यूबरकलॉसिस और टीबी जैसी बीमारी हो जाती हैं।

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First Published on March 31, 2017 1:44 pm

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