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देवी-देवताओं के ख़िलाफ़ लिखने पर लेखक के मुंह पर पोती स्याही, आरोपियों ने लगाए ‘जय श्री राम’ के नारे

दवाणगेरे के पुलिस अधीक्षक भीमशंकर गुलेड़ ने बताया कि इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
Author दवाणगेरे (कर्नाटक) | March 13, 2017 23:05 pm
योगेश मास्टर को हिंदू देवताओं के खिलाफ लिखने के लिए गंभीर दुष्परिणामों की चेतावनी दी गई थी। (एएनआई फोटो)

यहां के एक ‘प्रगतिशील’ लेखक के मुंह पर कुछ दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर काली स्याही पोत दी और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कुछ लिखने पर गंभीर दुष्परिणामों की धमकी भी दी। दवाणगेरे के पुलिस अधीक्षक भीमशंकर गुलेड़ ने बताया कि रविवार (12 मार्च) को जब योगेश मास्टर यहां चाय की एक दुकान पर चाय पी रहे थे तभी आठ-नौ लोगों ने उनके मुंह पर काली स्याही लगा दी और वहां से भाग गए। उन्होंने बताया कि विवादित कन्नड़ उपन्यास ‘दुन्धी’ के लेखक योगेश कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिका’ द्वारा आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल होने यहां आए हुए थे।

पत्रकार गौरी लंकेश इस साप्ताहिक पत्रिका को चलाते है। गुलेड़ ने बताया कि योगेश को हिंदू देवताओं के खिलाफ लिखने के लिए गंभीर दुष्परिणामों की चेतावनी दी गई थी। उन्होंने बताया कि संदिग्ध लोगों ने भागने से पहले ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया। उन्होंने बताया कि इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। गौरी लंकेश समेत सभी प्रतिभागियों और आयोजकों ने पुलिस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया और शिकायत दर्ज कराई।

उन्होंने कहा कि भाकपा के राज्य महासचिव सिद्दानागौड़ा पाटिल भी इस मार्च में शामिल थे। गुलेड़ ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हमलावर दक्षिणपंथी कार्यकर्ता थे और इस घटना की पूरी जांच और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। गुलेड़ ने बताया कि इस मामले की जांच करने के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया गया है।

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  1. चक्रपाणि पांडेय
    Mar 13, 2017 at 6:08 pm
    क्या हिन्दू देवी देवताओ के विरुद्ध लिखना प्रगतिशीलता की निशानी है. ? किसी के साथ शारीरिक प्रताडना भी कोइ विरोध व्यक्त करने का ी तरिका नहीं है. ये प्रगतिशीलता व विरोध का तरीका दोनो ही गलत ःहै.
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  2. B
    bitterhoney
    Mar 14, 2017 at 1:41 am
    जनसत्ता को यह भी बताना चाहिए कि किन देवी देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और क्या टिप्पणी की थी. हिन्दू धर्म से अन्धविश्वास समाप्त होना चाहिए. भगवान का अर्थ क्या है? क्या एक लाचार मनुष्य भगवान हो सकता है? भगवन को सर्वशक्तिमान होना चाहिए जो कि राम नहीं थे अगर सर्वशक्तिमान होते तो रावण सीता का हरण नहीं कर सकता था. और सीता को ग्रहण करने के लिए हनुमान की आवश्यकता नहीं पड़ती.
    Reply
  3. S
    sk
    Mar 14, 2017 at 6:17 am
    देवी देवताओ के खिलाफ बात हो गई और उसको उसकी सजा मिल गई , और वही दूसरी और छी न्यूज़ तारिक मुर्तद को बिठाकर मजे ले रहा है और कट्टरवादी लोग सोचते है की तारिक जो कह रहा है सात प्रतिशत सत्य है , वाह भैया क्या सिद्धान्त है आप लोगो के .................जबकि तारिक एक पत्रकार एक लेखक है इस्लामिक विद्द्वान नहीं !
    Reply
  4. K
    ks
    Mar 14, 2017 at 12:34 pm
    बच गए अगर मुसलमानो के अल्ला के बारे में लिखते तो सर काट कर जमीन पर होता सो एन्जॉय this फ्रीडम डोंट गिव another chance
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  5. R
    Raghuvansi
    Mar 13, 2017 at 6:50 pm
    Sahi kiya jisne bhi kalikh Pota ... Bcz ye hinduwon ko sasta samjhte hai Jo man kiya kar diya ... Bhai sudhar ja ... Aise vi log hai Jo sar vi kalam kar denge .... Jai hind
    Reply
  6. S
    sahil singla
    Mar 14, 2017 at 7:44 am
    तुम्हे यहाँ कमेंट डालने की आजादी मिली हो.. तो एन्जॉय थिस फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन... भगवन राम के करैक्टर के बारे में तुम जैसे लोगो की सलाह की जरूरत नहीं है.. नहीं तो मुह कला होने के बाद जय श्री राम के नारे भी लग सकते है.. सो वाच योर वर्ड्स...
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  7. S
    School Bus
    Mar 14, 2017 at 3:29 am
    उस लेखक को प्रगतिशील लेखक कहने की महानता जनसत्ता ही कर सकता है। किसी के आराध्य देवताओं के विषय में अपमानजनक टिप्पणी करना और चेतावनी देने के बाद भी जारी रखना एक जघन्य अपराध है। उस लेखक को अपने किए की सज़ा मिल गई है।रही बात अदालत की, तो वहाँ से त्वरित न्याय की यदि कोई उम्मीद होती तो यह नौबत ही क्यों आती?
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  8. शाहिद बस्तवी
    Mar 13, 2017 at 11:58 pm
    हाहाहाहा। जनसत्ता जिंदाबाद
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  9. S
    suresh k
    Mar 13, 2017 at 11:33 pm
    इस को बोलो जरा इस्लाम के खिलाफ लिखकर बताओ तुम्हारा सर कलम कर देंगे और जनसत्ता वालो तुम भी लिख कर बताओ
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