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कर्नाटक चुनाव जीतने के लिए एक साल का प्लान बना रहे राहुल गांधी, कांग्रेस नेताओं से करवाएंगे “परिक्रमा”

राहुल गांधी जून में बेंगलुरु में बूथ लेवल के पदाधिकारियों की बड़ी बैठक करके इस एक वर्षीय कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी एक रैली के दौरान। PTI Photo by Nand Kumar

आल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने कर्नाटक कांग्रेस में नई ऊर्जा भरने के लिए एक साल लम्बा कार्यक्रम बनाया है। कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस को आगामी विधान सभा चुनाव में भाजपा और जनता दल (सेकुलर) से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। एआईसीसी ने बूथ लेवल से लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने का फैसला किया है। एक साल लंबे इस कार्यक्रम की शुरुआत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी करेंगे।

राहुल गांधी जून में बेंगलुरु में बूथ लेवल के पदाधिकारियों की बड़ी बैठक करके इस एक वर्षीय कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के 30 जिलों की “राजनीतिक परिक्रमा” के दौरान कांग्रेसी विधायक, सांसद और अन्य नेता सिद्धारमैया सरकार के पिछले चार सालों की उपलब्धियों को जनता के सामने रखेंगे। सिद्धारमैया की सरकार 2013 में बनी थी। राज्य में अगले साल विधान सभा चुनाव होने हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के मौजूदा 122 विधायकों में से कई का टिकट आगामी चुनाव में कट सकता है। पार्टी आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने वाली है। शीघ्र ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष की घोषणा की जाएगी। माना जा रहा है कि अंदरूनी घमासान से जूझ रही राज्य कांग्रेस को केंद्रीय नेतृत्व कड़ा संदेश देने वाला है।

पीसीसी का नया प्रमुख नियुक्त किए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस हर स्तर पर पार्टी का पुनर्गठन करेगी। रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेसी आगामी चुनाव अपने दम पर लड़ने का इरादा बना चुकी है। पार्टी जेडीएस से गठबंधन के बजाय अकेले ही भाजपा की चुनौती का सामना करेगी। कर्नाटक की कुल 224 विधान सभा सीटों में से कांग्रेस के पास अभी 122 सीटें हैं। वहीं भाजपा और जेडीएस के पास 40-40 सीटें हैं।

साल 2013 में कांग्रेस ने भाजपा की जगदीश शेट्टर को सत्ता से बाहर करके अपनी वापसी की थी। कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा के पार्टी से निकाले जाने  से उसे बड़ा झटका लगा। येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा ने पहली बार किसी दक्षिण भारतीय राज्य में सरकार बनाई थी। भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद येदियुरप्पा की पार्टी में वापस ही गई है। भाजपा अगला विधान सभा चुनाव शायद उन्हीं के नेतृत्व में लड़ेगी।

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