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पानी का टैंकर ढोने वाला 25 साल का बालाकृष्‍णा कैसे बन गया मिस्‍टर एशिया, जानिए

बालाकृष्‍णा का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। वर्थुर गांव में वो अपनी बूढ़ी मां के साथ रहते हैं। उनके स्वर्गीय पिता बीएमटीसी में बस ड्राइवर थे। पिता की मौत के बाद मां ने घर की जिम्मेदारी संभालते हुए खेती करनी शुरू की।
Author नई दिल्ली | November 3, 2016 13:55 pm
हॉलीवुड एक्टर बने बालाकृष्ण के प्रेरणा और जीत लिया मिस्टर एशिया का टाइटल। Image Source: Facebook

बेंगलुरु के 25 साल के जी बालाकृष्‍णा ने हाल ही में मिस्टर एशिया 2016 का खिताब अपने नाम किया है। पेशे से वो एक वाटर टैंकर के ड्राइवर हैं। मिस्टर एशिया बनने से पहले वो 48 बार ओपन स्टेट कर्नाटक चैंपियन, चार बार श्रेष्ठ कर्नाटर विनर, सात सालों से मिस्टर इंडिया और भारत उड़ी का टाइटल अपने नाम कर चुके हैं। हाल ही में फिलिपिंस में हुई प्रतियोगिता में उन्होंने मिस्टर एशिया का खिताब भी अपने नाम कर लिया है। इस मुकाबले में उनके साथ 150 पुरुष और 100 महिलाओं ने हिस्सा लिया था। बालाकृष्णन के जिम में उनकी सात साल की यात्रा की कहानी तस्वीरों के जरिए दिखती है। केवल 17 साल की उम्र में उन्हें हॉलीवुड के एक्टर Arnold Schwarzenegger से प्यार हो गया था। कमांडो में उनका रोल बालाकृष्णन के लिए प्रेरणा बन गया। जिसके बाद उन्होंने एक्टर की प्रोफाइल को पढ़ना शुरू किया और अपने सपनों की तरफ उड़ान शुरू कर दी। इसी तरह वो अपनी मंजिल तक पहुंचें।

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बालाकृष्‍णा का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। वर्थुर गांव में वो अपनी बूढ़ी मां के साथ रहते हैं। उनके स्वर्गीय पिता बीएमटीसी में बस ड्राइवर थे। पिता की मौत के बाद मां ने घर की जिम्मेदारी संभालते हुए खेती करनी शुरू की। जिंदगी में काफी मुश्किलों का सामना करते हुए वो हमेशा अपने पैशन को पूरा करने के साथ ही अपनी मां को एक आरामदायक जिंदगी देना चाहते थे। बालाकृष्‍णा ने कहा- मेरी मां मेरी बहुत बड़ी समर्थक थी। वो मेरा आधार हैं। बचपन से ही उन्होंने मेरे सपनों को अपना समर्थन दिया है, चाहे वो छोटे रहे हों या बड़े। मैं आज जो भी हूं वो अपनी मां की वजह से हूं और मैं इस टाइटल को उन्हें समर्पित करता हूं।

बालाकृष्‍णा दो घंटे सुबह और तीन घंटे शाम को वर्कआउट करते हैं। बाकी के समय लो जिम में इंस्ट्रक्टर की जॉब के अलावा खुद का वाटर टैंकर चलाते हैं। उनका डाइट प्लान भी काफी स्ट्रिक्ट है। वो रोजाना 750 ग्राम चिकन, 25 अंडे, 200 ग्राम उबली सब्जियां, 300 ग्राम चावल, एक कप फल सलाद और दो चम्मच ओट प्रोटीन खाते हैं। बालाकृष्‍णा ने कहा- मेरी मां मेरे लिए इन सभी चीजों को लाने के लिए हर संभव प्रयास करती हैं। बालाकृष्‍णा हर रोज अपने सपने को देखते हुए सोया करते थे। एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने की वजह से उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जहां कर्नाटक सरकार और स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उनकी ना के बराबर मदद की वहीं शहर के लोग उनकी मदद के लिए आगे आए। अब वो नवंबर में होने वाले मिस्टर यूनिवर्स कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं।

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