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48 साल बाद मिला इंसाफ, किराएदार से मालिक को ऐसे वापस मिला फ्लैट

अपने एक कमरे के फ्लैट पर फिर से कब्जा पाने के लिए 48 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे मुम्बई के एक परिवार को आखिरकार इंसाफ मिल गया है क्योंकि बंबई उच्च न्यायालय ने किरायेदार को मकान खाली करने को कहा है।
Author मुंबई | September 10, 2017 16:22 pm

अपने एक कमरे के फ्लैट पर फिर से कब्जा पाने के लिए 48 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे मुम्बई के एक परिवार को आखिरकार इंसाफ मिल गया है क्योंकि बंबई उच्च न्यायालय ने किरायेदार को मकान खाली करने को कहा है। मुकदमा करने वाले यहां के निवासी नवीनचंद्र नानजी अदालत में इस मामले के लंबित रहने के दौरान चल बसे थे और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों ने राहत पाने के लिए एड़ी-चोटी लगा दी।  उनकी कोशिश अंतत: रंग लायी जब उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पिछले हफ्ते आदेश दिया कि उनके किरायेदार सीवड़ी इलाके का उनका मकान 12 हफ्ते के अंदर खाली करें। यह मकान उन्हें 1967 में किराये पर दिया गया था।

न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी न्यायिक प्रणाली की सुस्ती पर भी अफसोस भी प्रकट किया। उन्होंने कहा, ‘‘एक सजग न्यायिक मस्तिष्क के लिए यह एक झटका है कि इस मामले में करीब 48 साल पहले खाली कराने का वाद दर्ज किया गया था। जल्द ही प्रतिवादी इस मुकदमे की स्वर्णजयंती मनायेंगे। जहां याचिकाकर्ता इस वाद के फल के लिए इंतजार करते हैं वहीं प्रतिवादी किरायेदार न्यायिक प्रक्रिया की व्यवस्थागत सुस्ती का अपात्र लाभार्थी है।

अर्जी के अनुसार नानजी 1969 में निचली अदालत पहुंचे थे क्योंकि किराये पर देने के दो साल बाद उनके किरायेदार जिवराज भानजी ने मकान खाली करने के नोटिस पर ध्यान देने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि उसने उस फ्लैट में कानूनी तौर पर स्थायी परिवर्तन कराया गया है। नानजी निचली अदालत पहुंचे। कुछ महीने बाद नानजी को पता चला कि भानजी, उसकी पत्नी और उसके पांच बच्चे वडाला इलाके में एक अन्य मकान में चले गये लेकिन वे सेवरी फ्लैट का अपने मजदूरों के कैंटीन के रुप में अवैध रुप से प्रयोग करने लगे। निचली अदालत ने 1984 में सेवरी फ्लैट खाली करने का आदेश दिया।

लेकिन मुम्बई स्मॉल काउज कोर्ट की अपीली पीठ ने इस फैसले को पलट दिया। वहां भानजी ने दलील दी कि वडाला में उसकी पत्नी और बच्चों ने किराये पर मकान लिया है तथा वह न तो उसका मालिक है औ न ही किरायेदार। वर्ष 1988 में नानजी के बेटे उच्च न्यायालय पहुंचे। इसी बीच भानजी मर गया लेकिन सीवड़ी वाला फ्लैट उसके बच्चों के कब्जे में रहा। इस साल चार सितंबर को न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने व्यवस्था दी कि अपीली अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटकर गंभीर भूल की।

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