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न्यायपालिका की अति सक्रियता का मामला संसद में उठा

न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामलों में न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन अदालतों में लंबित मामलों का निपटारा वह नहीं कर पा रही है
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

लोकसभा में भाजपा के एक सदस्य ने न्यायपालिका की ‘अति सक्रियता’ की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वह विभिन्न संस्थाओं के कामकाज का लेखाजोखा रखने का काम कर रही है। लेकिन अदालतों में लंबित मामलों की जिम्मेदारी नहीं लेती है। लोकसभा में शून्यकाल में भाजपा के उदित राज ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले का जिक्र किया जिसमें प्रदेश सरकार की सेवाओं में 2002 के बाद से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण को रद्द किया गया है। उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की दिशा में पहल करने की सरकार से मांग की। उदित राज ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के समय में पदोन्नति में आरक्षण के समर्थन में संशोधन किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इसे बनाए रखा लेकिन मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट ने इसके उलट फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा, ‘न्यायालय की अतिसक्रियता से गरीबों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे विकास की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामलों में न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन अदालतों में लंबित मामलों का निपटारा वह नहीं कर पा रही है। वह किसी बात की जिम्मेदारी केंद्र सरकार तो किसी अन्य बात की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर लगा देती है। नैनीताल हाई कोर्ट राष्ट्रपति पर टिप्पणी कर रहा है।

कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के आलोक में केंद्र सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या इसमें कोई गुप्त एजंडा है। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार इस मामले में यह सुनिश्चित करे कि आरक्षण के लाभार्थियों के हित प्रभावित न हों और उनके साथ कोई अन्याय नहीं हो। लोकसभा में सोमवार को स्वर्ण आभूषणों पर एक फीसद उत्पाद शुल्क लगाने का मुद्दा उठा।

कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि छोटे आभूषण निर्माता और कारीगरों ने अपनी आजीविका चलाने के लिए हड़ताल वापस ले लिया है लेकिन वे सब डरे हुए हैं। शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए हुड्डा ने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस विषय को लेकर दो महीने तक हड़ताल जारी रही। इस व्यवसाय से पांच करोड़ लोग जुड़े हैं। स्वर्ण आभूषणों पर एक फीसद उत्पाद शुल्क लगाने के विषय पर उत्पन्न स्थिति पर सरकार पहल कर रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को इस विषय पर विचार करने का दायित्व सौंपा गया।

हुड्डा ने कहा कि अभी आभूषण कारोबारियों और कारीगरों का बंद खत्म हो गया है लेकिन जो छोटे कारीगर अपनी आजीविका नहीं चला सकते थे, उन्होंने ही बंद खत्म किया है। कांग्र्रेस सदस्य ने कहा कि एक फीसद उत्पाद शुल्क लगाने से 1400 करोड़ रुपए आमदनी होगी। लेकिन यह बड़ा विषय नहीं है। विषय यह है कि इसमें 70 फीसद लोग गांव के छोटे कारोबारी और कारीगर हैं। मध्यम वर्ग सोने को निवेश के तौर पर देखता है। यह वर्ग प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हीरे की कटिंग पर कोई उत्पाद शुल्क नहीं लगता है, पर सोने के आभूषणों पर ऐसा करना ठीक नहीं है।

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