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दाढ़ी नहीं कटवाने के चलते नौकरी से निकाला गया था जवान, न्यायिक पीठ ने माना सही हुआ

मक्तुमहुसेन ने न्यायाधिकरण के समक्ष एक याचिका दायर कर सेना के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी दाढ़ी काटने से मना करने पर सेना की नौकरी से निकाल दिया गया था।
Author कोच्चि | June 5, 2016 00:30 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की कोच्चि पीठ ने सेना के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सेना ने एक सैनिक को इसलिए बर्खास्त कर दिया था, क्योंकि उसने धार्मिक आधार पर अपनी दाढ़ी काटने से मना कर दिया था। मक्तुमहुसेन ने न्यायाधिकरण के समक्ष एक याचिका दायर कर सेना के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी दाढ़ी काटने से मना करने पर सेना की नौकरी से निकाल दिया गया था।

मक्तुमहुसेन आर्मी मेडिकल कोर में अप्रैल 2001 में सैनिक के रूप में शामिल हुआ था और उसे साल 2010 में 371 फील्ड हास्पिटल में स्थानांतरित किया गया था। उसकी अपील पर कमांडिंग अधिकारी ने उसे धार्मिक आधार पर दाढ़ी बढ़ाने की अनुमति दी थी। उसे निर्देश दिए गए थे कि वह नए आइडी कार्ड के लिए आवेदन करे और यह शर्तें लगा दी गई थी कि उसे यह लिखकर देना होगा कि अपनी बची हुई नौकरी के दौरान उसे दाढ़ी रखनी होगी। हालांकि, उसे दी गई यह अनुमति बाद में वापस ले ली गई।

न्यायाधिकरण ने बताया कि कमांडिंग अधिकारी ने उसे चार्जशीट भेजी थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि बार-बार मौखिक और लिखित रूप से निर्देश देने पर भी उसने अपनी दाढ़ी काटने से मना कर दिया है। इस आरोप पर उस पर मुकदमा चलाया गया, उसे दोषी पाया गया और मिलिटरी हिरासत में 14 दिन के कैद की सजा दी गई थी। बाद में उसे कमांड हास्पिटल (एससी) पुणे में स्थानांतरित कर दिया गया था। जब उसने ड्यूटी ज्वाइन की रिपोर्ट दी, उस समय उसे कमांडिंग अधिकारी ने दाढ़ी कटवाने के लिए कहा था, लेकिन उसने ऐसा करने से मना कर दिया, जिसके चलते उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

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