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झारखंड: जबरन धर्मांतरण के खिलाफ बनाए गए कानून धर्म स्वतंत्र विधेयक, 2017 को मंत्रिमंडल की मंजूरी

नए कानून के प्रावधान के मुताबिक यदि यह अपराध नाबालिग महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति के प्रति किया गया है तो कारावास चार साल तक का और जुर्माना एक लाख रुपए तक हो जाएगा।
Author रांची | August 2, 2017 02:03 am
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास।(फाइल फोटो)

झारखंड सरकार ने राज्य में जबरन धर्मांतरण को निषिद्ध करने वाले विधेयक के प्रारूप को अपनी स्वीकृति दे दी। प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।  एक सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक, 2017’ के प्रारूप को मंगलवार को अनुमोदित कर दिया। विधेयक की धारा तीन में बलपूर्वक धर्मांतरण पर रोक लगाई गई है। धारा तीन के उल्लंघन के लिए तीन साल तक के कारावास या 50 हजार रुपए तक के जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। नए कानून के प्रावधान के मुताबिक यदि यह अपराध नाबालिग महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति के प्रति किया गया है तो कारावास चार साल तक का और जुर्माना एक लाख रुपए तक हो जाएगा।

भाजपा ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि जबरन धर्मांतरण राष्ट्रविरोधी गतिविधि है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। झारखंड भाजपा के महामंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि पार्टी राज्य मंत्रिमंडल की ओर से स्वीकृत नए धर्मांतरण निरोधी विधेयक का स्वागत करती है, क्योंकि इससे राष्ट्र और विशेषकर आदिवासी संस्कृति की रक्षा हो सकेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में पूर्व में आदिवासियों और शोषितों के बड़े पैमाने पर प्रलोभन और जोर-जबर्दस्ती से धर्म परिवर्तन का इतिहास रहा है। इसे देखते हुए ऐसे कानून की लंबे समय से जरूरत थी। प्रकाश ने कहा कि पूर्व के कानून की कमियों का लाभ उठाकर राज्य में अभी भी बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।

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