December 03, 2016

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नक्सल प्रभावित गांव में पहली बार पहुंची बिजली, बुजुर्गों ने कहा- बल्ब जलता देख कर जीवन सफल हो गया

गारू गांव में विकास की योजनाओं को लेकर लंबी उपेक्षा रही है क्योंकि हमला कर नक्सली यहां पर कोई काम नहीं होने देते।

Author लातेहार (झारखंड) | November 14, 2016 14:17 pm
झारखंड राज्य में लातेहार जिले का गारू गांव। (गूगल मैप)

झारखंड के एक नक्सल प्रभावित गांव में पहली बार बिजली पहुंचने के कारण ‘सही मायने’ में इस साल दिवाली मनायी गई है। नई दिल्ली से करीब 1,400 किलोमीटर और झारखंड की राजधानी रांची से 175 किलोमीटर दूर स्थित गारू गांव लातेहार जिले में आता है जो राज्य में सर्वाधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल है। गारू गांव के प्रधान शिव शंकर सिंह ने बताया, ‘हम लंबे समय से बिजली की प्रतीक्षा कर रहे थे। सरकार के प्रतिनिधि हमें लंबे समय से बिजली मुहैया कराने का आश्वासन दे रहे थे लेकिन हमें बिजली इस साल मिली।’ ग्राम परिषद के एक सदस्य सुखदेव ओरांव ने बताया, ‘यहां पर बिजली आने के बाद हमें डीजल खरीदने की जरूरत नहीं रह गयी है। ऐसे में खेती में सुधार हो रहा है। हालांकि वोल्टेज कम है लेकिन लोग इस कदम से खुश हैं।’ गारू गांव में विकास की योजनाओं को लेकर लंबी उपेक्षा रही है क्योंकि हमला कर नक्सली यहां पर कोई काम नहीं होने देते।

सीआरपीएफ की 112 बटालियन के कमांडेन्ट रमेश कुमार ने बताया, ‘नक्सली इलाके में किसी भी तरह के विकास कार्य का विरोध करते हैं जिसके कारण कोई निजी बिल्डर ठेका लेने के लिए तैयार नहीं होता है। ऐसा तभी हो सका जब सीआरपीएफ से सुरक्षा और संरक्षा का आश्वासन मिला और उन्होंने सड़कों का निर्माण कार्य शुरू किया।’ इस इलाके में अन्य विकास कार्य भी शुरू हुए हैं। कुमार ने बताया, ‘हमारे सशस्त्र जवान सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं ताकि नक्सली ना तो हमला कर पाएं और ना ही काम रोक सकें। अब सड़क मार्ग से पूरा इलाका अच्छी तरह से जुड़ गया है।’ उन्होंने बताया, ‘हम लोगों में जितना हो सके, सुरक्षा बलों को लेकर अधिक से अधिक विश्वास बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। हम लोगों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें अपनी योजना में शामिल कर रहे हैं। हम उन्हें अपने नंबर दे रहे हैं और उनके साथ संपर्क में रहते हैं।’

गारू से विधायक राम लाल प्रसाद ने बताया कि सीआरपीएफ के इलाके में आने से बहुत ज्यादा बदलाव आया है। एक स्थानीय निवासी संजय प्रसाद ने बताया, ‘पहली बार गारू गांव में बिजली आयी है। सही मायने में पहली बार यहां के लोगों ने दिवाली मनाई है।’ एक ग्रामीण सुधीर यादव ने बताया, ‘आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लोग यहां पर क्या महसूस कर रहे हैं। कुछ बुजुर्गों ने कहा है कि एक बल्ब कैसे जलता है यह देख कर उनका जीवन सफल हो गया।’ सीआरपीएफ के उपायुक्त प्रकाश चंद्र बादल ने बताया कि लभर इलाके को शामिल किए बिना गांव में विद्युतीकरण का काम लगभग नामुमकिन था। लभर इलाके में एक समय नक्सलियों का प्रशिक्षण शिविर और ठिकाना था।

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First Published on November 14, 2016 12:43 pm

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