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जाट हिंसा जांच: निशाना बनी 90 प्रतिशत संपत्त‍ियां गैर जाटों की, कुछ ने खुद जला दीं अपनी दुकानें

हरियाणा सरकार को मुआवजे के लिए जो आवेदन मिले हैं उसके मुताबिक, 1789 संपत्‍त‍ियों को नुकसान पहुंचाया गया। इनमें से 1500 शहरी, जबकि 289 ग्रामीण इलाकों में हैं।
Author चंडीगढ़ | April 20, 2016 01:45 am
हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान आगजनी और हिंसा के शिर लोगों ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी मदद नहीं की। (Express file Photo)

जाट आरक्षण की मांग को लेकर फरवरी महीने में हरियाणा में हुई हिंसा की घटना की जांच कर रहे पैनल की रिपोर्ट में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि हिंसा के दौरान जलाए गए 90 पर्सेंट घर, दुकानें और व्‍यवसायिक प्रतिष्‍ठान गैर जाट समुदाय के लोगों के थे। हिंसा की जांच कर रहे प्रकाश सिंह पैनल ने पाया कि प्रदर्शनकारियों ने सैनी, राजपूत, पंजाबी और दूसरी जातियों के लोगों की दुकानों की पहचान करने के बाद उन्‍हें जला दिया। यह एक पूर्व नियोजित तरीके के तहत किया गया। पैनल के सामने 3 हजार से ज्‍यादा चश्‍मदीदों ने गवाही दी हैं। पैनल अपनी रिपोर्ट दाखिल करने ही वाली है। इस रिपोर्ट के तथ्‍यों की जानकारी द इंडियन एक्‍सप्रेस को मिली है। इससे पहले, यह भी पता चला था कि हिंसा के दौरान बहुत सारे अफसर अपनी जिम्‍मेदारी निभाने में नाकाम रहे। कुछ ने अपनी शक्‍त‍ियां जूनियर अफसरों को सौंप दी। इसके अलावा, केंद्र सरकार से इनपुट मिलने के बाद अफसर उचित कदम उठाने में नाकाम रहे।

सरकार को मुआवजे के लिए जो आवेदन मिले हैं उसके मुताबिक, 1789 संपत्‍त‍ियों को नुकसान पहुंचाया गया। इनमें से 1500 शहरी, जबकि 289 ग्रामीण इलाकों में हैं। पैनल को यह भी पता चला कि बहुत सारे मौकों पर दुकानदारों ने आगजनी का फायदा उठाया और खुद अपनी दुकानें जला दीं ताकि इंश्‍योरेंस की रकम या मुआवजे का दावा किया जा सके। सरकार से जो कुल 2085 मुआवजों के दावे किए गए हैं, उनमें से 40 स‍ंदिग्‍ध हैं। बयानों और हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद पैनल ने पाया कि गैर जाट समुदाय के लोगों ने जाट नेताओं की मूर्तियों, जाटों के धर्मशालाओं के अलावा दुकानों और घरों को नुकसान पहुंचाकर प्रतिक्रिया दी।

पैनल को ऐसे कई मामले मिले, जब पुलिसवाले हिंसा के दौरान गायब मिले। एक मौके पर पुलिस सोनीपत स्‍थि‍त गोहाना में जलते हुए बाजार को बचाने के लिए सात घंटे तक मौके पर ही नहीं पहुंची। हालांकि, इस जगह के करीब ही सुरक्षाकर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी मौजूद थी। एक अन्‍य घटना के तहत, प्रदर्शनकारियों ने एक गैर जाट की किताबों की दुकान जला दी। पैनल के सामने अपने बयान में दुकानदार ने आरोप लगाया कि फायर स्‍टेशन को कई बार कॉल करने के बावजूद मदद के लिए कोई नहीं आया। जब सब कुछ जल गया, उसके बाद एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची। उसका यह भी आरोप है कि बाद में एक जाट फायर अफसर ने उससे मारपीट भी की। दस्‍तावेज से पता चलता है कि पैनल ने जब उस अफसर से पूछताछ कि तो वह संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहा।

भाग-1 हरियाणा: जांच रिपोर्ट में खुलासा जाट पुलिसकर्मियों ने कर दिया था विद्रोह, नहीं माने थे सरकार के आदेश

भाग-2 जाट हिंसा जांच: सरपंच-बुजुर्गों के घर में पुलिसवालों को छिपाने पड़े हथियार, फैसले लेने में नाकाम रहे अफसर

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