May 23, 2017

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घाटी में आतंकियों ने फिर किया EDI की इमारत पर कब्जा

एक सरकारी इमारत के भीतर छुपे आतंकवादियों और सुरक्षा बलों की बीच सोमवार को भारी गोलीबारी में सेना का एक जवान घायल हो गया।

Author श्रीनगर | October 11, 2016 02:57 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पंपोर इलाके में एक सरकारी इमारत के भीतर छुपे आतंकवादियों और सुरक्षा बलों की बीच सोमवार को भारी गोलीबारी में सेना का एक जवान घायल हो गया। आठ महीने से भी कम समय में परिसर पर यह दूसरा आतंकी हमला है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दो से तीन आतंकवादी सोमवार तड़के उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआइ) परिसर की एक इमारत में घुस गए। अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी शायद नदी के किनारे की तरफ से परिसर में घुसे लेकिन अभियान पूरा होने के बाद ही कुछ पता चल सकेगा। उन्होंने बताया कि परिसर में घुसने के बाद आतंकियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों का ध्यान खींचने के लिए छात्रावास के एक कमरे में कुछ गद्दों में आग लगा दी। इमारत से धुआं उठने के चंद मिनट के भीतर ही सुरक्षा बल वहां पहुंच गए। उन्होंने बताया कि शुरुआती गोलीबारी में एक जवान घायल हो गया।

सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मार गिराने के लिए मोर्टार गोले, हल्के मशीन गन और छोटे हथियारों का इस्तेमाल किया लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि ईडीआइ परिसर की घेराबंदी कर दी गई है और अभियान मंगलवार तक चल सकता है। उन्होंने बताया कि रात में आतंकी भाग नहीं पाएं इसलिए परिसर के आसपास नजर रखी जाएगी।  आतंकियों ने इसी साल फरवरी में भी ईडीआइ भवन को निशाना बनाया था। उस वक्त 48 घंटे तक चले अभियान में दो युवा सैन्य अधिकारियों सहित पांच सुरक्षाकर्मी और संस्थान का एक कर्मचारी मारा गया था और तीन आतंकियों को मार गिराया गया था।

इस बीच, मुहर्रम के आठवें दिन को देखते हुए अधिकारियों ने एहतियातन श्रीनगर के 11 पुलिस स्टेशनों के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नौहट्टा, खानयार, रैनवाड़ी, सफाकदल, महाराजगंज, मैसुमा, राम मुंशी बाग, शहीद गंज, करालहुद, करन नगर और बटमालू क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारी ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन कर्फ्यू लगाया गया है। पारंपरिक मुहर्रम जुलूस इन क्षेत्रों से होकर गुजरता था, लेकिन 1990 से आतंकवाद के उभार के बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि धार्मिक जुलूस का फायदा अलगाववादी राजनीति के प्रचार के लिए हो सकता है। आतंकी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में अभी भी समान्य जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है। व्यापारिक प्रतिष्ठान, पेट्रोल पंप और शैक्षणिक संस्थान घटना के94 दिन बाद बंद हैं और सड़कों से सार्वजनिक परिवहन भी नदारद है।

 

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First Published on October 11, 2016 2:56 am

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