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अलगाववादियों पर बरसे राजनाथ सिंह, कहा- उनके व्यवहार में नहीं है कश्मीरियत-इंसानियत

राजनाथ ने कहा कि वे कश्मीर पर वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन स्पष्ट किया कि यह केवल संविधान के दायरे में होगी।
Author श्रीनगर | September 5, 2016 15:51 pm
श्रीनगर में प्रेस वार्ता के लिए आते केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह। (Photo by S Irfan/5 Sep 2016)

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करने से इनकार करने पर सोमवार (5 सितंबर) को हुर्रियत नेताओं पर हमला बोला और कहा कि अलगाववादियों के व्यवहार ने दिखा दिया कि वे कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत में विश्वास नहीं करते हैं। राजनाथ ने कहा कि कश्मीर पर ‘वार्ता के लिए दरवाजे और खिड़कियां’ हमेशा खुली हैं, लेकिन उन्होंने निकट भविष्य में पाकिस्तान से किसी तरह की बातचीत की संभावना से यह कहते हुए इनकार किया कि ‘पहले हमें अपने देश के भीतर लोगों से बात करने दीजिए।’

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे राजनाथ ने इसकी यात्रा के दूसरे दिन संवाददाताओं से कहा, ‘प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य अपनी व्यक्तिगत हैसियत से हुर्रियत नेताओं से मिलने गए । हमने :जाने के लिए न तो ‘हां’ कहा और न ही ‘ना’ कहा ।’ उन्होंने कहा, ‘प्रतिनिधियों द्वारा दी गई सूचना :इस बारे में कि सदस्यों से कैसा व्यवहार किया गया: यह स्पष्ट करती है कि यह न तो कश्मीरियत है और न ही इंसानियत ।’ अलगाववादियों ने रविवार (4 सितंबर) को माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, जदयू के शरद यादव, राजद के जयप्रकाश नारायण और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी जैसे सांसदों के उन तक पहुंच बनाने के प्रयासों को कोई तवज्जो नहीं दी थी।

राजनाथ ने अलगाववादियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘सदस्य कल (रविवार, 4 सितंबर) बात करने गए थे, लेकिन बातचीत से इनकार कर उन्होंने (अलगाववादियों ने) दिखा दिया कि वे जम्हूरियत में भी विश्वास नहीं करते।’ कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के घर पर सांसदों के लिए दरवाजा तक नहीं खोला गया, जबकि लोगों ने बाहर नारे लगाए। राजनाथ ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा अलगाववादियों को पत्र लिखकर प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने का आग्रह किए जाने के कदम का समर्थन करने या न करने के बारे में पूछे गए सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया।

उन्होंने कहा, ‘हां मेरे पास उस बारे में सूचना है, उन्होंने एक पत्र लिखा था।’ मंत्री ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि राज्य सरकार में पीडीपी की सहयोगी भाजपा इस कदम का समर्थन करती है या नहीं। राजनाथ ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि वह अलगाववादियों के साथ पीछे के चैनल के जरिए बातचीत या कश्मीर मुद्दे पर वार्ताकारों की नई टीम नियुक्त करने को लेकर बहस में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा, ‘ट्रैक वन, ट्रैक टू, ट्रैक थ्री…मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता।’ गृहमंत्री ने कहा कि घाटी में अशांति शुरू होने के समय से, कश्मीर की अपनी पूर्व की यात्राओं की तरह ही उन्होंने राज्य में शांति एवं सामान्य स्थिति चाहने वाले किसी भी व्यक्ति से बातचीत की अपनी इच्छा व्यक्त की थी।

राजनाथ ने कहा कि वे कश्मीर पर वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन स्पष्ट किया कि यह केवल संविधान के दायरे में होगी। उन्होंने कहा, ‘इस बारे में कोई दो राय नहीं हैं कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। मैं जानता हूं कि कश्मीर के लोग भी यही चाहते हैं।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘बातचीत के लिए हमारे दरवाजे ही नहीं, बल्कि खिड़कियां भी खुली हैं।’ राजनाथ ने कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थिति सुधरेगी और प्रतिनिधिमंडल से मिलने वाले हर व्यक्ति ने यह इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा, ‘जिससे भी हम मिले, हर किसी ने इच्छा व्यक्त की कि कश्मीर में स्थिति सुधरनी चाहिए…।’

गृहमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि जम्मू कश्मीर में स्थिति सुधरेगी।’ कश्मीर में अशांति शुरू होने पर कश्मीर की अपनी जुलाई यात्रा का उल्लेख करते हुए राजनाथ ने कहा कि जिन लोगों से वह मिले, उन्होंने पेलेट गनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की मांग की थी। उन्होंने कहा, ‘हमने एक विशेषज्ञ समिति गठित की जिसे दो महीने के भीतर पेलेट गनों के विकल्प पर रिपोर्ट देनी थी। समिति ने समय से पहले ही अपनी रिपोर्ट दे दी और अब पावा आ चुका है।’ गृहमंत्री ने कहा, ‘मुझे लगता है कि पावा के इस्तेमाल से किसी की जान नहीं जाएगी।’ उन्होंने कहा कि रविवार को कश्मीर में 1,000 गैर घातक पावा गोले पहुंच चुके हैं।

राजनाथ ने कहा कि 20 दलों के 26 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर आया क्योंकि वे घाटी में स्थिति को लेकर काफी गंभीर थे। उन्होंने कहा कि घाटी में स्थिति में सुधार के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने इससे बात करने वाले लोगों से सुझाव लिए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्र पीडीपी के स्व शासन और नेशनल कान्फ्रेंस के संविधान के तहत व्यापक स्वायत्तता प्रस्तावों पर विचार करने की इच्छा रखता है, गृहमंत्री ने कहा, ‘यदि जरूरी हुआ तो हम उनसे भविष्य में फिर सुझाव लेंगे।’ एक अन्य सवाल के जवाब में राजनाथ ने कश्मीर पर पाकिस्तान से निकट भविष्य में किसी बातचीत की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा, ‘पहले, हमें अपने देश के भीतर लोगों से बात करने दीजिए। इसे देश से बाहर मत ले जाइए।’

राजनाथ ने कहा, ‘देश में संसद सबसे बड़ी पंचायत है और यह कश्मीर की स्थिति को लेकर बहुत गंभीर है। इस पंचायत ने लोगों से बात करने के लिए प्रतिनिधिमंडल कश्मीर भेजने का फैसला किया।’ उन्होंने कहा, ‘हम कश्मीर में स्थिति को लेकर न सिर्फ चिंतित हैं, बल्कि आहत भी हैं। हमें हर किसी के सहयोग की आवश्यकता है।’ सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की वार्ता का ब्योरा देते हुए राजनाथ ने कहा कि उन्होंने विभिन्न तबकों के 300 लोगों के 30 से अधिक प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘हमने राजनीतिक दलों, समाज के लोगों, विश्वविद्यालय शिक्षकों, कुलपतियों, फल उत्पादकों, छात्रों और कुछ बुद्धिजीवियों से बात की।’ गृहमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे कश्मीरी युवकों की चिंताओं के समाधान के लिए मंत्रालय ने डॉ. संजय राय को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है जिनसे इन फोन नंबरों 011-23092923, 23092885 पर संपर्क किया जा सकता है।

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