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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा: घर-बार छोड़ कर शिविरों में रहने को तैयार नहीं लोग

जम्मू क्षेत्र में सौ से अधिक शिविर बनाए हैं। लेकिन लोग अपनी फसलों और पशुओं का हवाला देकर अपने घरों की ओर लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
Author जम्मू | October 4, 2016 04:05 am
जिले के दो से तीन गांवों से ढाई सौ से अधिक लोग पूरी तरह से पलायन कर गए और सुरक्षित शिविरों में रह रहे हैं जो अस्थायी हैं।

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसी आपात स्थिति में लोगों के रहने की व्यवस्था करने के लिए अधिकारियों ने जम्मू क्षेत्र में सौ से अधिक शिविर बनाए हैं। लेकिन सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले अधिकतर लोग अपनी फसलों और पशुओं का हवाला देकर अपने घरों की ओर लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जम्मू क्षेत्र के तीन जिलों में सुरक्षित शिविरों में रह रहे लोगों की संख्या घट रही है क्योंकि सीमावर्ती इलाके में रहने वाले लोग अपने घर खाली छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

कठुआ के सीमावर्ती जिले के उपायुक्त रमेश कुमार ने बताया कि जिले के दो से तीन गांवों से ढाई सौ से अधिक लोग पूरी तरह से पलायन कर गए और सुरक्षित शिविरों में रह रहे हैं जो अस्थायी हैं। शेष लोग अपने घरों और खेतों को छोड़ने के प्रति अनिच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि हमने पूरे जिले में 34 स्थानों की पहचान की है जहां पर 15000 से अधिक लोग रहते हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी में ये लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन अभी तक काम कर रहे 20 शिविरों में से केवल तीन शिविरों में लोग रह रहे हैं। जिला उपायुक्त ने बताया कि अधिकांश लोग अपने घरों को लौट गए हैं। कुछ लोग जम्मू और अन्य स्थानों पर रहने वाले अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

इसी तरह की स्थिति सीमावर्ती सांबा जिले में भी है जहां 25,000 से अधिक लोग किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित हो जाएंगे। सांबा के डीसी शीतल नंदा ने बताया कि सुरक्षित शिविर बनाने के लिए कई स्थलों की पहचान की गई है। इनमें से पांच काम कर रहे हैं। यह जिला सीमावर्ती है लेकिन यहां अब तक सब कुछ शांतिपूर्ण है। ऐसे में अब तक कोई पलायन नहीं हुआ है। हम लोग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

 

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