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कश्‍मीर में भीड़ को भगाने में नाकाम हो रहे पावा शैल, सरकार कर सकती है बदलाव

कश्मीर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के विकल्प के रूप में हाल ही में लाये गये ‘पावा गोलों’ में केंद्र सरकार बदलाव का विचार कर रही है।
कश्मीर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के विकल्प के रूप में हाल ही में लाये गये ‘पावा गोलों’ में केंद्र सरकार बदलाव का विचार कर रही थी। (Photo:PTI)

कश्मीर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के विकल्प के रूप में हाल ही में लाये गये ‘पावा गोलों’ में केंद्र सरकार बदलाव का विचार कर रही है। क्योंकि कुछ कमियों की वजह से ये कम प्रभावी साबित हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने खासतौर पर सीआरपीएफ ने जमीनी मूल्यांकन किया है और उनका मानना है कि मिर्च पाउडर से भरे पावा गोले प्रदर्शन कर रही भीड़ को पूरी तरह तितर-बितर करने में कामयाब नहीं रहे। अपने आप पिघलने वाला गोले का आवरण पिघलने में समय लेता है और इस दौरान भीड़ तेजी से इन गोलों को जवानों पर वापस उछाल देती है। सूत्रों के मुताबिक गोलों के फटने के बाद इनसे निकलने वाले मिर्च के गुबार के असर को भी बढ़ाने की जरूरत है।

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ग्वालियर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की आंसू गैस इकाई (टीएसयू) से इन विसंगतियों को दूर करने को तथा बदलाव के बाद नई खेप भेजने को कहा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने के बाद भीड़ नियंत्रण के लिए एक विकल्प तलाशने के लिहाज से विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। समिति ने ‘पावा गोलों’ को तरजीह दी जो कम घातक माने गये और अस्थाई रूप से भीड़ को निस्तेज करने में सक्षम हैं। इससे पहले पैलेट गन से युवाओं की आंखों को हो रहे गंभीर नुकसान के चलते पावा गोलों के इस्‍तेमाल का फैसला लिया गया था।

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मिर्च आधारित यह कम घातक हथियार निशाने को अस्थाई रूप से अक्षम बना देता है और वे कुछ मिनट के लिए जड़ हो जाते हैं। ‘पावा’ का पूरा नाम ‘पेलऑर्गेनिक एसिड वैनिलिल एमिदे’ है और इसे नोनिवामिदे के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऑर्गेनिक यौगिक है जो प्राकृतिक रूप से मिर्च में पाया जाता है। पैलेट गन के प्रयोग के कारण घाटी में कई लोग घायल हो गए हैं और अंधेपन के शिकार हो गए हैं, इसके कारण भारी आलोचना हो रही है।

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