June 27, 2017

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कश्मीर: पुलिस कार्रवाई में पांच महीने में 9000 लोग घायल, इनमें 1200 बच्चे

8 जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद घाटी में भड़की हिंसा में घायल हुए 9010 लोगों में 1248 ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 15 साल से भी कम है।

Author November 11, 2016 08:27 am
आधिकारिक सूत्र ने बताया कि श्रीनगर के तीन प्रमुख हॉस्पिटल में ऐसे 1300 घायल लोग मिले, जिनकी आंख में पेलेट गन लगी थी।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं, जिनके मुताबिक 8 जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद घाटी में भड़की हिंसा में घायल हुए 9010 लोगों में 1248 ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 15 साल से भी कम है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को घाटी के विभिन्न अस्पतालों से मिले डेटा के मुताबिक 2 नवंबर तक अस्पताल में भर्ती घायल लोगों की कुल संख्या 9010 है। इनमें से 6205 पेलेट गन से जख्मी हुए, 365 गोली से जख्मी हुए, वहीं 2436 लोग “अन्य चोटों” से घायल हुए हैं। हालांकि “अन्य चोटों” से क्या तात्पर्य था यह साफ नहीं किया गया, लेकिन एक अधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि ये लोग पुलिस और सिक्योरिटी फोर्स की पिटाई में घायल हुए हैं।

सूची में यह भी साफ नहीं किया गया कि आंख में पेलेट गन लगने से कितने लोग घायल हुए हैं, हालांकि आधिकारिक सूत्र ने बताया कि श्रीनगर के तीन प्रमुख हॉस्पिटल में ऐसे 1300 घायल लोग मिले, जिनकी आंख में पेलेट गन लगी थी। सूत्रों ने बताया कि इनमें से अधिकतर युवा हैं और पेलेट गन से कुछ पूरी तरह अंधे हो गए हैं और कुछ की एक आंख की रोशनी चली गई है। आंकड़ों के मुताबिक, घायलों में 12 साल से कम उम्र के 243 बच्चे हैं और 12-15 साल की उम्र के 1005 बच्चे हैं।

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डेटा में बताया गया कि घायल होने वाले बच्ची की संख्या सबसे कम सेंट्रल कश्मीर में रही, वहीं सबसे ज्यादा लोग पुलवामा इलाके में घायल हुए। यहां 1571 लोग सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। अन्य जिलों की बात करें तो अनंतनाग में 1417 लोग, कुल्गाम में 1391 लोग, शोपियां में 1002 लोग, बारामुला में 1287 लोग, बंदीपोर में 756 लोग, कुप्वाड़ा में 989 लोग घायल हुए।

आपकों बता दें कि हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में लगातार अशांति बनी हुई है। इन चार महीनों में कश्मीर में जमकर हिंसा हुई। कश्मीर में हिसा के दौरान उग्र भीड़ को काबू में लाने के लिए पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया। पैलेट गन के इस्तेमाल से कई लोगों की आखों में चोटें आईं, जिस वजह से इसके इस्तेमाल को लेकर काफी विवाद भी हुआ।

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First Published on November 11, 2016 8:17 am

  1. A
    Akash soni
    Nov 11, 2016 at 4:31 am
    Ye vo bacche hai..jo paisa lekr police valo aur army me patthar fakte hai.bechre police vale ab iske alava kya upay bachta hai unke pas.vo bhi insaan hi hai aakhr.
    Reply
    1. R
      raj kumar
      Nov 11, 2016 at 7:31 am
      जो इस समय खतरनाक हालात में भी ड्यूटी कर रहे हैं और जो इन लोगो पर पत्थर फ़ेंक रहे हैं उनके लिए मीडिया और कथित बुद्धिजीवी विलाप कर रहे हैं शर्म अणि चाहिए ऐसे मिडिया और बुद्धिजीविओं पर क्या उन्हें ड्यूटी कर रहे लोगो के मरने या घायल होने की कोई फिक्र नहीं हे जब ऐसे लोग इस देश में हैं तो फिर दुश्मनो की जरुरत कहाँ रह जाती हे
      Reply
      1. B
        Braham Prakash
        Nov 11, 2016 at 6:18 am
        ये खुद जिम्मेवार हैं, बच्चे वहां कोई दूध नहीं पि रहे थे, सेना पे पथराव करेंगे ? इनको तो ख़त्म ही कर देना चाहिए था. इन ो को सेना ने बाढ़ से बचाया, भूल गए सब.
        Reply
        सबरंग