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कश्मीर में 24 जुलाई तक स्कूल-कॉलेज बंद, अखबार दूसरे दिन भी नहीं छपे

सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में बुरहान वानी और उसके दो साथियों की मौत हो गई थी जिसके बाद नौ जुलाई से कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।
Author श्रीनगर | July 17, 2016 18:24 pm
कश्मीर में स्थिति को संभालने के लिए तैनात सुरक्षाबलों के जवान। (Photo Source: Indian Express/Shuaib Masoodi)

घाटी के हालात के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्कूल और कॉलेजों की छुट्टियां एक हफ्ता और बढ़ा दी है। स्कूल-कॉलेजों को कल खुलना था लेकिन अब ये 25 जुलाई को खुलेंगे। हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से घाटी में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने बताया, ‘हमने स्कूल और कॉलेजों की गर्मी की छुट्टियां एक और हफ्ता बढ़ाने का फैसला लिया है।’ उन्होंने बताया कि यह फैसला घाटी में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। घाटी में 17 दिन की गर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल और कॉलेज सोमवार (18 जुलाई) को खुलने थे। अगर हालात सामान्य रहे तो 25 जुलाई को ये संस्थान खुल जाऐंगे। सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में वानी और उसके दो साथियों की मौत हो गई थी जिसके बाद नौ जुलाई से यहां हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।

सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में एक पुलिसकर्मी समेत 39 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1,500 सुरक्षा बलों समेत 3,160 लोग घायल हुए हैं। अलगाववादी समर्थक हड़ताल और प्रशासन की ओर से लगाए गए कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों के कारण घाटी में जनजीवन अस्तव्यस्त है। सरकार की मीडिया पर की गई कथित ‘कार्रवाई’ के बाद कर्फ्यूग्रस्त कश्मीर घाटी में रविवार (17 जुलाई) लगातार दूसरे दिन भी स्थानीय अखबार नहीं छपे। शनिवार (16 जुलाई) को कथित तौर पर प्रशासन ने कुछ मीडिया घरानों में छापा मारा था और प्रकाशित प्रतियों को कब्जे में ले लिया था। इसके विरोध में अखबार मालिकों ने अखबार नहीं छापने का फैसला लिया और इंग्लिश, उर्दू तथा कश्मीरी किसी भी भाषा का अखबार बाजार में नहीं आया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कथित तौर पर शहर के बाहर औद्योगिक इलाके रंगरेथ में स्थित कम से कम दो अखबारों की प्रिंटिग प्रेस के दफ्तरों पर छापे मारे थे और उन्हें अखबार प्रकाशित नहीं करने दिए थे। पुलिसकर्मियों ने अखबारों की प्लेटें और प्रकाशित प्रतियां जब्त कर ली और प्रिंटिग प्रेस को बंद कर दिया। पुलिस कार्रवाई के बाद कश्मीर के अखबारों के संपादकों, प्रकाशकों और मुद्रकों के बीच शनिवार (16 जुलाई) को प्रेस कॉलोनी में बैठक हुई। पत्रकारों ने भी कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया। कश्मीर के अखबारों के संपादकों, मुद्रकों और प्रकाशकों की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि वे सरकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं।

इस बीच शनिवार (16 जुलाई) को देर रात घाटी में केबल टीवी सेवा बहाल हो गई। यह बीते 24 घंटे से बाधित थी। हालांकि कुछ इलाकों में पाकिस्तानी चैनल नहीं आ रहे हैं। कानून-व्यवस्था के मद्देनजर बीएसएनएल की सेवा को छोड़कर घाटी में अन्य मोबाइल सेवाएं अब भी निलंबित हैं। उत्तरी कश्मीर के बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिलों में शनिवार (16 जुलाई) को लैंडलाइन फोन कनेक्शन काट दिए गए थे। जबकि घाटी में सभी लैंडलाइन कनेक्शनों में इंटर-एक्सचेंज कॉल सुविधा को सोमवार (18 जुलाई) को बंद कर दिया गया।
इसके बाद अपने गृह जिलों से बाहर के किसी फोन पर कॉल नहीं किया जा सकता है। बीते आठ दिनों से घाटी में बीएसएनएल के अलावा सभी मोबाइल सेवाएं रद्द हैं। ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा भी नहीं चल रही हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया, ‘हमले और प्रदर्शन के लिए भीड़ को टेलीफोन के जरिए उकसाया जा रहा था।’

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