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कश्मीरी पंडितों ने किया सर्वदलीय शिष्टमंडल का बहिष्कार, कहा- यह सिर्फ आंखों में धूल झोंकना है

कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन पनून कश्मीर ने अलगाववादियों के सामने भेंट करने के लिए मिन्नत करने’ को लेकर सांसदों की आलोचना की।
Author जम्मू | September 5, 2016 18:09 pm
श्रीनगर में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में सर्वदलीय शिष्टमंडल जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ घाटी में शांति बहाली के लिए बैठक करते हुए। (PTI Photo/PIB/4 Sep 2016)

कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन पनून कश्मीर ने सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ बैठक का सोमवार (5 सितंबर) को बहिष्कार करते हुए कहा कि यह सिर्फ आंखों में धूल झोंकना है और ‘अलगाववादियों के सामने भेंट करने के लिए मिन्नत करने’ को लेकर सांसदों की आलोचना की। पनून कश्मीर के संयोजक अग्निशखेर ने संवाददाताओं से कहा कि कश्मीरी पंडितों के विभिन्न संगठनों के 12 प्रतिनिधियों को जम्मू आए सर्वदलीय शिष्टमंडल से मिलने के लिए बुलाया गया था और उन्हें महज आठ मिनट, 2:55 से 3:03 अपराह्न का समय दिया गया था। अग्निशखेर ने कहा, ‘अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचाराधाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 12 प्रतिनिधि इस समयावधि में सर्वदलीय शिष्टमंडल के सामने कुछ भी तर्कपूर्ण तरीके से कैसे कह सकेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘हम आज (रविवार, 5 सितंबर) यहां सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ बैठक का बहिष्कार कर रहे हैं क्योंकि यह केवल आंखों में धूल झोंकना है जो यह दिखाने का प्रयास कर रहा है कि राष्ट्रवादियों को भी वार्ता में शामिल किया गया है, जबकि वे कश्मीर में अलगाववादियों से शिष्टमंडल के सदस्यों के लिए कम से कम दरवाजा खोलने की भीख मांग रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह हमारे और जम्मू के पूरे राष्ट्रवादी क्षेत्र के समक्ष स्पष्ट है कि राज्य सरकार के साथ भारत सरकार भी सिर्फ राज्य के राष्ट्रवादियों से मिलने का ढ़ोंग कर रही है। हमने आज जम्मू आ रहे सर्वदलीय शिष्टमंडल से नहीं मिलने का फैसला किया है।’

इसे ‘क्रूर मजाक’ बताते हुए पनून कश्मीर के अध्यक्ष अजय चुरूंगू ने कहा, ‘वे सैयद अली शाह गिलानी जैसे अलगाववादियों के दरवाजे तक जा रहे हैं जो लोकतांत्रिक प्रणाली और धर्मनिरपेक्षता नहीं, बल्कि शरिया का कानून चाहते हैं।’ उन्होंने दावा किया कि शिष्टमंडल को जम्मू भेजने का फैसला बाद में लिया गया और वह मूल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था।

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