May 26, 2017

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कश्मीर में अभी भी पटरी पर नहीं लौटी जिंदगी, 88 वें दिन भी जीवन बाधित

अलगाववादी प्रायोजित हड़ताल के कारण लगातार 88वें दिन भी सामान्य जीवन बाधित रहा।

Author श्रीनगर | October 5, 2016 07:09 am
व्यापारिक केंद्र लाल चौक सहित शहर के कई इलाकों में बस को छोड़कर निजी और सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही में वृद्धि हुई है।

कश्मीर के कई हिस्सों में अभी भी सामान्य जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है। अलगाववादी प्रायोजित हड़ताल के कारण लगातार 88वें दिन भी सामान्य जीवन बाधित रहा लेकिन लगभग तीन महीने की अशांति के बाद लोग अपने रोजमर्रा की गतिविधियों को वापस रास्ते पर लाने की कोशिश में हैं। दूसरी ओर सरकार ने विदेशी पर्यटकों को लद्दाख के लेह जिले के प्रतिबंधित क्षेत्रों की यात्रा करने की अनुमति देने के लिए संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) व्यवस्था में ढील दी है। सरकार के इस निर्णय से क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने और स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास होने की उम्मीद है। अधिकारी ने बताया कि कई सड़क विक्रेताओं ने फल, सब्जी, ताजा जूस, चाय और स्नैक्स बेचने के लिए अपने स्टॉल टीआरसी चौक के आस पास लगाए और दिन भर अपनी व्यापारिक गतिविधियां जारी रखीं। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के सिविल लाइन वाले इलाके में कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोली। इसके अलावा शहर के बाहर की भी कुछ दुकानें खुलीं।

अधिकारियों ने बताया कि व्यापारिक केंद्र लाल चौक सहित शहर के कई इलाकों में बस को छोड़कर निजी और सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही में वृद्धि हुई है। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने लोगों की आवाजाही पर कहीं भी रोक नहीं लगाई है। लोग सुरक्षित महसूस करें इसके लिए बाजारों और कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि लोग बिना किसी डर के अपना कामकाज कर सकें। उन्होंने बताया कि हर दिन कश्मीर की स्थिति बेहतर हो रही है।  हालांकि घाटी के जिला मुख्यालयों और कस्बों सहित कई इलाकों में अलगाववादी प्रायोजित बंद के कारण 88वें दिन भी जनजीवन प्रभावित रहा। इन क्षेत्रों की ज्यादातर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद ही रहे। अधिकारियों के मुताबिक हड़ताल के कारण अभी भी छात्र स्कूल नहीं जा रहे हैं। ज्यादातर जगहों पर सरकारी संस्थान खुले हुए हैं और शिक्षक ड्यूटी पर मौजूद भी हैं। सरकारी दफ्तरों और बैंकों में भी आनेवालों की संख्या में सुधार हो रहा है।

उधर विदेशी पर्यटकों को प्रतिबंधित क्षेत्रों की यात्रा अनुमति देने के लिए पीएपी परमिट में ढील दी गई है। इस निर्णय से अब विदेशी पर्यटकों को लेह में नुब्रा घाटी के यारमा गोम्पा-यारमा गोनबो मठ समेत पनामिक, फुकपोचे, हरगम, तक्ष, ससोमा, चगलुंग, कोबेट, अरानु, खेमी और वारशी जैसे कई क्षेत्रों में यात्रा के लिए अनुमति मिल जाएगी।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने मंगगलवार बताया कि सरकार ने विदेशी पर्यटकों को लेह में अब तक प्रतिबंधित क्षेत्रों की यात्रा करने की अनुमति देने के लिए संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) में ढील देने का आदेश दिया है। 27 सितंबर को इस सबंध में राज्य के गृह विभाग द्वारा एक औपचारिक अधिसूचना जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि 2015 में क्षेत्र को स्थानीय पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था और ऐसा इन दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन और आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए किया गया था। दस हजार फुट की औसत ऊंचाई पर स्थित नुब्रा घाटी अपनी असाधारण सुदंरता, बौद्ध मठों और पश्मीना बकरी पालन के लिए जानी जाती है। राज्य में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के एक दिन बाद से ही लगातार सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष चल रहा था, जिसमें दो पुलिस वाले सहित 83 लोगों की मौतें हो चुकी हैं और करीब एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

 

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First Published on October 5, 2016 7:07 am

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