ताज़ा खबर
 

जम्मू कश्मीर: पत्रकार पर लगा सुरक्षा बलों की ‘फर्जी खबर’ छापने का आरोप, केस रजिस्टर, अखबार बैन

जम्मू कश्मीर के एक पत्रकार पर सुरक्षा बलों को लेकर कथित झूठी खबर चलाने के लिए मामला दर्ज हुआ है।
कश्मीर रीडर के पत्रकार इसफाक रेशी पर धारा 505 लगी है।

जम्मू कश्मीर के एक पत्रकार पर सुरक्षा बलों को लेकर कथित झूठी खबर चलाने के लिए मामला दर्ज हुआ है। जिस पत्रकार पर यह केस लगा है उसका नाम इसफाक रेशी है। वह कश्मीर रीडर में ट्रेनी रिपोर्टर काम कर रहा है। कश्मीर रीडर को फिलहाल के लिए सरकार द्वारा बैन कर दिया गया है। कश्मीर रीडर की जिस खबर को लेकर बवाल है वह 28 सितंबर को छापी गई थी। रिपोर्ट कश्मीर में जल रही फसलों को लेकर थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकारी बल ने गांववालों की फसल जलाकर बर्बाद कर दी थी। खबर कुछ गांव वालों के बयानों के आधार पर तैयार की गई थी। इसफाक अप्रैल 2016 से कश्मीर रीडर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कश्मीर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी से कनवर्जेंट पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उनपर धारा 505 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा था कि जानबूझकर मामले को सुरक्षा बलों के साथ जोड़ा गया था।

वह रिपोर्ट अखबार के पहले पन्ने पर प्रकाशित हुई थी। उसमे तीन फोटोग्राफ भी दी गई थीं। खबर में बुदरन, अदीना, खानीमा, मजहमा के गांववालों के हवाले से कहा गया था कि पुलिस,अर्द्धसैनिक बलों और सैनिकों ने उनकी चावल की उस फसल को आग लगाने वाली गोलियां मारी थीं जो कि उन्होंने धूप में सूखने के लिए छोड़ रखी थीं। कश्मीर पुलिस के बयान के दो दिन बाद ही सरकार ने कश्मीर रीडर पर बैन लगा दिया था। श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट फारुख अहमद लोन ने कहा था कि कश्मीर रीडर पर अगला आदेश आने तक बैन लगा रहेगा। तब से पेपर पर अबतक बैन लगा हुआ है।

रेशी पर लगे केस के बारे में जब कश्मीर रीडर के एडिटर से बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘उस मुद्दे पर बाकी लोगों ने भी खबर छापी थी। सबने वही लिखा था जो कि हमने लिखा। पुसिस ने उन रिपोर्ट्स का भी खंडन किया था। लेकिन एफआईआर सिर्फ हमारे खिलाफ भी रजिस्टर हुई। उन्होंने हमारी रिपोर्ट का कोई अलग से खंडन भी नहीं किया था और पूरे दो दिन बाद अपना बयान जारी किया था। उस बयान में भी अलग से हमारा कोई नाम नहीं लिया गया था।’ वहीं रेशी ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, ‘गांववालों ने ही वह आरोप लगाए थे। हम तो सिर्फ तथ्यों को पुख्ता करने के लिए वहां गए थे।’

इस वक्त की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. D
    Deepak Bhatt
    Dec 4, 2016 at 8:21 am
    ये न्यूज वाले ज्यादातर जवानों के खिलाफ ही लिखते है इन्हे तो जेल डाल देना चाहिए.
    (0)(0)
    Reply
    1. D
      deepak sharma
      Dec 4, 2016 at 11:49 am
      कश्मीर में राष्ट्र विरोधी समाचारो को प्रकाशित करने वाले समाचारपत्रों पर लगभग पञ्च वर्ष पूर्व डीएवीपी द्वारा सरकारी विज्ञापनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था उसके बावजूद राज्य सर्कार द्वारा इन्हें पोषित किया जा रहा हैं यह इन्ही नीतियों के कारण निरंकुश बने बैठे हैं।
      (0)(0)
      Reply