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कश्मीर में आतंकवादी को दफनाने के दौरान दहशतगर्दों ने गोलियां चलाकर ‘सलामी’ दी

कश्मीर बाजार इलाके में एक सड़क हादसे की जांच के लिए जा रहे पुलिस के दल पर आतंकवादियों के गोली चलाने के बाद शनिवार को जवाबी कार्रवाई में फयाज मारा गया था।
Author श्रीनगर | May 8, 2017 01:38 am
आतंकी के मौत पर कश्मीर में लहराया गया पाकिस्तान का झंडा (फोटो सोर्स एपी)

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों का एक समूह एक आतंकवादी को दफनाए जाने के समय रविवार को मौजूद रहा। आतंकवादियों ने हवा में गोलियां चलाकर आतंकी को ‘सलामी’ दी। कुलगाम के कैमोह इलाके का रहने वाला फयाज अहमद अर्फ सेठा को दफनाए जाने के दौरान यह चिंताजनक घटना सामने आई। मीर बाजार इलाके में एक सड़क हादसे की जांच के लिए जा रहे पुलिस के दल पर आतंकवादियों के गोली चलाने के बाद शनिवार को जवाबी कार्रवाई में फयाज मारा गया था। हमले में शनिवार को दो नागरिक और एक पुलिसकर्मी भी मारा गया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादी को दफनाए जाने के दौरान भीड़ में कम से कम चार आतंकवादी दिखाई दिए और उन्होंने एके राइफल से हवा में गोलियां चलाकर मृतक आतंकवादी को ‘बंदूक से सलामी’ दी। यह घटना तब सामने आई है जब कुछ दिन पहले सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के सफाए के लिए पड़ोसी शोपियां जिले में बड़ा अभियान चलाया था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार हाल में आतंकवादी को दफनाए जाने के दौरान आतंकवादियों के मौजूद रहने की घटनाएं देखी गई हैं जो चिंताजनक माना जा रहा है। 34 टीवी चैनलों के खिलाफ कार्रवाई : जम्मू-कश्मीर सरकार ने राज्य के सभी बाकी पेज 8 पर उपायुक्तों को राज्य में दिखने वाले 34 टीवी चैनलों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। इनमें पाकिस्तान और सऊदी अरब के चैनल भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने इन चैनलों द्वारा हिंसा भड़काने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की आशंका के बाद यह निर्णय किया है।इससे पहले केंद्र ने राज्य सरकार से सूबे में पाकिस्तान और सऊदी अरब के चैनलों के अनधिकृत तरीके से दिखाए जाने को रोकने के लिए गृह विभाग के प्रधान सचिव आरके गोयल ने राज्य के सभी उपायुक्तों को शनिवार आदेश जारी किया था।

उन्होंने आदेश में कहा, ‘इस तरह की खबरें मिल रही हैं कि घाटी के केबल आॅपरेटर कुछ चैनलों को दिखा रहे हैं (जिसकी अनुमति भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से नहीं है)।’ आदेश में कहा गया कि यह संज्ञान में लाए जाने की जरूरत है कि बिना अनुमति वाले चैनलों को दिखाया जाना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि इससे कश्मीर घाटी में हिंसा भड़क सकती है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। गोयल ने उपायुक्तों से यह स्पष्ट करने को कहा कि इस बाबत क्या कार्रवाई की गई।
घाटी में आइएस का बढ़ता प्रभाव चिंताजनक : सुरक्षा एजंसियां
सुरक्षा एजंसियों के मुताबिक अगर आइएस के बढ़ते प्रभाव को नहीं रोका गया तो यह घाटी की स्थिति के लिए खतरनाक हो सकता है। पिछले छह महीने में घाटी के कुछ युवकों ने इराक और सीरिया में संदिग्ध आतंकवादियों के साथ इंटरनेट पर 100 से अधिक बार संपर्क किया है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक वर्ष में घाटी से सीरिया और इराक में इंटरनेट पर हुए संपर्क पर नजर रखी गई। वर्ष 2014, 2015 और 2016 में मामूली घटनाएं सामने आई थीं। लेकिन इस वर्ष की शुरुआत में विस्तृत निगरानी प्रणाली स्थापित करने के बाद सौ से ज्यादा लोगों को इन दोनों देशों में संदिग्ध आतंकवादियों से बातचीत करते हुए पाया गया।

घाटी के कुछ छोटे इलाके के युवक सीरिया और इराक में एक-दो आतंकवादियों से संपर्क करने के प्रयास में हैं। पिछले महीने पुलवामा में बाकी पेज 8 पर हिज्बुल मुजाहिद्दीन के एक आतंकवादी की कब्र पर दो नकाबपोश बंदूकधारी दिखे जिस दौरान उन्होंने वहां उपस्थित लोगों से तालिबान और आइएस द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने और पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने या उसका समर्थन नहीं करने के लिए कहा। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने तीन मिनट से ज्यादा समय तक भड़काऊ भाषण दिए। आतंकवादी संगठन यूनाइटिड जिहाद काउंसिल के साथ ही हिज्बुल मुजाहिद्दीन की स्थानीय इकाई ने घटना को तवज्जो नहीं दी वहीं सुरक्षा अधिकारी इसे गंभीरता से ले रहे हैं।

 

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