January 17, 2017

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जम्मू और कश्मीर: सच्चे निगहबान हैं फौज के श्वान सैनिक

जब देश सोता है, लोग जानते हैं कि हम जागे हुए हैं और हम जब झपकी लेते हैं तो हम जानते हैं कि ये श्वान जागे हुए हैं। ये श्वान आतंकवाद निरोधी अभियानों में अहम भूमिका तो निभाते हैं।

Author दैलगाम | October 13, 2016 01:19 am
सेना के जवान अपने श्वान सैनिकों के साथ ।

आतंकवाद निरोधी अभियान में काम के लंबे और कठिन दिन के बाद ‘ट्रैक्टर’ और ‘सैम’ दक्षिण कश्मीर के दुर्गम गांव में स्थित अपने-अपने शिविरों में पहुंचते हैं, जहां उनका किसी नायक की तरह स्वागत होता है। कुछ सैन्यकर्मी उन्हें थपथपाते हैं। कुछ उनकी तरफ गेंद उछालते हैं और कुछ उन्हें बिस्किट की पेशकश करते हैं। आखिर, आतंकवाद निरोधी अभियान में उन्होंने देसी विस्फोटक का पता लगाकर या किसी संदिग्ध गतिविधि की तरफ सैनिकों को खबरदार कर एक कारनामा जो अंजाम दिया था।

‘ट्रैक्टर’ एक रॉटवीलर है, जबकि ‘सैम’ एक जर्मन शेफर्ड। दोनों ही नायाब श्वान हैं, जो सेना की राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात हैं और दक्षिण कश्मीर में कोकरानाग, अचबल, मागम के जंगलात और पहलगाम के संवेदनशील इलाकों पर निगाह रखते हैं। दोनों ही ने आठ जुलाई के उस अभियान में हिस्सा लिया था, जिसमें हिज्बुल मुजाहिदीन का आतंकवादी बुरहान वानी और दो अन्य मारे गए थे। सेना के एक मेजर ने ‘ट्रैक्टर’ और ‘सैम’ का जिक्र करते हुए कहा कि सफल अभियान के बाद मेरे इन दोनों सहकर्मियों ने भी अन्य सहकर्मियों के साथ राहत की सांस ली है। इन श्वान पर सड़क पर लगाए गए किसी आइइडी का सूंघकर पता लगाने या भाग रहे किसी आतंकवादी का पीछा करने या किसी संभावित घुसपैठ के प्रति खबरदार करने की जिम्मेदारी है।

एक सैन्य अधिकारी ने कहा कि जब देश सोता है, लोग जानते हैं कि हम जागे हुए हैं और हम जब झपकी लेते हैं तो हम जानते हैं कि ये श्वान जागे हुए हैं। ये श्वान आतंकवाद निरोधी अभियानों में अहम भूमिका तो निभाते ही हैं, साथ में सैनिकों कीथकान दूर करते हैं। सैनिक उनके साथ खेलकर अपना तनाव दूर करते हैं। सेना के एक अन्य मेजर बताते हैं कि हमारा अध्ययन करने, हमें समझने और हमारे मूड-मिजाज के अनुरूप खुद को एडजस्ट करने का इन श्वानों का अपना ही तंत्र है। उन्होंने बताया कि ‘जोजा’ है, जो बकरवाली श्वान है। वह पर्वतीय इलाकों का शौकीन है। ‘सीजर’ रॉटवीलर है, जो हिंसक भीड़ से निबटने में सुरक्षा बलों की मदद करता है।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि पिछले माह हिंसक प्रदर्शनकारियों ने हमारे कैंप पर पथराव किए और बोतलें फेंकीं। हमने गोलियां चलाने से परहेज किया, क्योंकि इससे लोग हताहत हो सकते थे। इसके बजाय हमने दो श्वान छोड़ दिए, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को न सिर्फ खदेड़ दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि वे फिर से इकट्ठा न होंं।

 

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First Published on October 13, 2016 1:19 am

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