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कश्‍मीर समस्‍या के लिए पाकिस्‍तान जिम्‍मेदार नहीं है: उमर अब्‍दुल्‍ला

पूर्व विदेश राज्यमंत्री अब्दुल्ला बीते तीन दशकों के दौरान कश्मीर घाटी में पनपे तीन हिंसक विरोध प्रदर्शनों का संदर्भ दे रहे थे।
Author July 30, 2017 13:41 pm
नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला

जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में किसी भी समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन पाकिस्तान ने कश्मीर घाटी में हिंसक अस्थिरता पैदा नहीं की है। यहां कश्मीर पर आयोजित एक संगोष्ठी में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अब्दुल्ला ने कहा कि वह इस बात से वाकिफ हैं कि घाटी में किसी भी समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। अब्दुल्ला ने कहा, “हमें पता है कि हर समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन हमें यह भी पता है कि वे 2008, 2010 और 2016 में उपजे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के पीछे नहीं थे।”

पूर्व विदेश राज्यमंत्री अब्दुल्ला बीते तीन दशकों के दौरान कश्मीर घाटी में पनपे तीन हिंसक विरोध प्रदर्शनों का संदर्भ दे रहे थे। नई दिल्ली कश्मीर घाटी में पनपे इन हिंसक विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप इस्लामाबाद पर लगाता रहा है, जिससे पाकिस्तान हमेशा इंकार करता रहा है। अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में मुख्यधारा की राजनीति का प्रभाव सिकुड़ने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार सहित हम सभी को लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने और केंद्र सरकार तथा अलगाववादियों के बीच बातचीत की पहल जैसे चुनावी वादे पूरे कर पाने में असफलता के चलते राज्य में मुख्यधारा के राजनीतिज्ञों की विश्वसनीयता घटी है। अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि वे केंद्र सरकार और हुर्रियत के बीच बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत शुरू करवाएंगे। लेकिन पीडीपी-भाजपा गठबंधन अपने वादे पूरे नहीं कर सका।

बता दें कि शनिवार को ही मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पाकिस्तान के साथ कारोबार बंद नहीं किया जाना चाहिए तथा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए किए गए पहल ‘लाहौर घोषणा’ को विस्तार देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ कारोबार को सुदृढ़ करने की जरूरत है तथा दोनों पड़ोसी देशों के बीच दूरी कम करने के प्रयासों को रोकना नहीं चाहिए।

महबूबा ने कहा कि वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान भारत और पाकिस्तान के संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में लाहौर घोषणा दोनों देशों द्वारा उठाया गया सर्वश्रेष्ठ कदम था।

देखिए वीडियो - जम्मू-कश्मीर की तरह कर्नाटक राज्य को भी चाहिए अलग झंडा

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  1. Y
    yatinderaggarwal
    Jul 30, 2017 at 3:39 pm
    इसके लिए जवाहर लाल और श्री शेख अब्दुल्ला जिम्मेदार हैं. जौहर लाल इसलिए कि उसने सेना को कश्मीर पूर्ण रूपेण आज़ाद करने के लिए जो समय सेना ने माँगा उसको नहीं दिया और केंद्रीय मंत्रिमंडल में विचार किये बिना संयुक्त राष्ट संघ में ले गया. शेक अब्दुल्ला इस लिए कि धारा ३७० और जनसंग्रह उनके कहने पर ही लगायी गयी. यह कहाँ न्यायपूर्ण है कि कोई भी काश्मीरी भारत में कहीं भी कूच खरीद सकता है लेकिन भारत का राष्ट्रपति भी जम्मू और काश्मीर में एक गज जमीं नहीं खरीद सकता. कोई भी काश्मीरी भारत में कही भी मकान खरीद कर रह सकता है लेकिन भारत के किसी और प्रदेश में रहने वाला वहां मकान खरीद कर नहीं रह सकता. जब जम्मू और काश्मीर का भारत में विलय हो गया था तो जनमत संग्रह का क्या मतलब रह जाता है और जनमत करवाना ही था तो समय कि कोई सीमा रक्खी जाती. जब काश्मीर पर पाकिस्तानी सेना और कबीले वाले अत्याचार कर रहे थे और औरतो कि इज़्ज़त लूट रहे थे तब अपनी जान तो दें हिंदुस्तानी सेना और जब मतलब निकल गया तो भारतीय कौन. हम तो पाकिस्तान का हिस्सा बनेंगे या आज़ाद रहेंगे. यह एहसानफरामोशी ही कहलाती है ? ब, देश न भूलो.
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