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नोट बैन ने ली नवजात की जान, पिता ने कहा- 500-1000 का खुल्ला नहीं होने की वजह से नहीं मिली एंबुलेंस

नवजात का पिता गुरुवार की रात चार घंटे तक सड़कों पर दौड़ता रहा लेकिन 500 और 1000 रुपये का खुल्ला नहीं होने की वजह से कोई भी एंबुलेंस वाला जाने को तैयार नहीं हुआ।

राजस्थान के पाली जिले में एक शख्स चम्पालाल मेघवाल नवजात बच्चे को एंबुलेंस से बड़े अस्पताल ले जाने के लिए गुरुवार की रात चार घंटे तक सड़कों पर दौड़ता रहा लेकिन 500 और 1000 रुपये का खुल्ला नहीं होने की वजह से कोई भी एंबुलेंस वाला जाने को तैयार नहीं हुआ। जबतक कि उसके परिवार ने किसी तरह 100-100 के कुछ नोट का जुगाड़ किया, नवजात की मौत हो चुकी थी। पेश से किसान चम्पालाल मेघवाल ने कहा कि उसने अभी तक पत्नी को नवजात की मौत के बारे में नहीं बताया है। यह उनका पहला बच्चा था। नवजात की मौत के एक घंटे बाद ही अस्पताल ने प्रसूता मनीषा को डिस्चार्ज कर दिया है और अब वो अपने गांव लापोड में है। 24 साल के मेघवाल ने कहा, “वह लगातार पूछ रही है कि मेरा बेटा कहां है और मैं लगातार उससे झूठ बोल रहा हूं कि वो इलाज के वास्ते अभी भी अस्पताल में ही है।” मेघवाल को डर है कि नवजात की मौत का सदमा उनकी पत्नी सह नहीं पाएगी।

मेघवाल ने कहा, “हमारे बच्चे का जन्म गुरुवार को शाम 4.11 बजे पाली के बांगड़ सरकारी अस्पताल में हुआ लेकिन जन्म के चार घंटे बाद उसे सांस लेने में तकलीफ हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे जोधपुर (80 किलो मीटर दूर) रेफर कर दिया।” अस्पताल में तीन एंबुलेंस थे लेकिन उस वक्त वहां नहीं थे। इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें अपना एंबुलेंस अरेंज करने को कहा।

मेघवाल ने कहा, “वहां एंबुलेन्स थे। उनलोगों ने 6000 से 7000 रुपये तक किराया मांगा वो भी 100 और 50 रुपये के नोट में। उस वक्त हमारे परिवार के 6-7 लोग अस्पताल में थे, सब के पास पैसे थे लेकिन वो 500 या 1000 के नोट थे।” मेघवाल ने कहा, “मैंने एंबुलेंस वालों से बहुत प्रार्थना की उनसे मोलभाव करने की भी कोशिश की लेकिन वो लोग 500 और 1000 का नोट लेने को तैयार नहीं हुए।” आखिरकार रात 12.30 बजे नवजात की मौत हो गई।

बांगड़ सरकारी अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम एस राजपुरोहित ने माना कि मेघवाल ने उनसे प्राइवेट एंबुलेंस की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया था लेकिन अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थे। उधर, पाली के जिलाधिकारी कुमार पाल गौतम ने बांगड़ अस्पताल के पीएमओ को मामले की जांच करने को कहा है। गौतम ने कहा,  “हमने अस्पताल के पीएमओ को एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।यह कमेटी मामले की जांच करेगी और मुझे रिपोर्ट सौंपेंगी। रिपोर्ट के मिलने के बाद ही आगे हम कुछ कह सकेंगे।”

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