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नरेंद्र भंडारी की रिपोर्ट: थाली में जो बचा महंगाई मार गई…

दिल्ली में दालों की करीब 80 फीसद आपूर्ति विदेशी बाजारों से हो रही है। वहीं थोक मंडियों में दालें इन दिनों मुंबई से आ रही हैं। दालों के दाम भी मुंबई में बैठे व्यापारी ही तय कर रहे हैं।
Author नई दिल्ली | June 5, 2016 02:06 am
बाज़ार में सब्जी विक्रेता अपनी दुकान पर। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

गर्मी ने दिल्ली के पसीने पहले ही छुड़ा रखे थे और अब दाल-सब्जियों के बढ़ते दामों ने भी लोगों को बेहाल करना शुरू कर दिया है। बीते एक पखवाड़े से दाल और सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। बीते साल इसी अवधि में जिन सब्जियों के दाम 10 से 12 रुपए थे, उनके दाम अब बढ़कर 30 से 40 रुपए हो गए हैं। खुदरा बाजार में दाल और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। घरों में दाल-रोटी खाना भी आम परिवारों को भारी पड़ रहा है।

खुदरा बाजार में बीते दो महीने से दाल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। ज्यादातर दालों की कीमतों में 30 से 40 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। बाजार में अरहर की दाल, जो दो महीने पहले 130 रुपए किलो मिलती थी, वह अब 180 रुपए किलो मिल रही है। चने की दाल 70 रुपए से बढ़कर 85 रुपए प्रति किलो हो गई है। धुली मूंग दाल की कीमत 100 रुपए से बढ़कर 130 रुपए प्रति किलो हो गई है। मसूर की दाल 90 रुपए से बढ़कर 130 रुपए किलो और राजमा की कीमत 70 रुपए से बढ़कर 110 रुपए प्रति किलो हो गई है। इसी तरह काले चने की कीमत 60 रुपए से बढ़कर 85 रुपए हो गई है।

इसी तरह फुटकर बाजार में सब्जी और फलों के दाम भी बढ़ रहे हैं। राजधानी में फुटकर दुकानों पर टमाटर 40 रुपए प्रति किलों बिक रहा है। इसके लगातार बढ़ रहे दामों पर कोई नियत्रंण भी नहीं कर पा रहा है। पिछले दिनों फुटकर बाजार में टमाटर 20 रुपए किलो बिक रहा था। दिल्ली में अन्य सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। प्याज का दाम 35 रुपए किलो पर पहुंच गया। भिंडी का दाम 40 रुपए किलो से बढ़कर 80 रुपए किलो पर पहुंच गया है। बैंगन के दाम 40 रुपए से बढ़कर 60 रुपए किलो पर पहुंच गया है। खीरा 10 रुपए से बढ़कर 30 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। आलू के दाम 40 रुपए प्रति किलो के करीब हैं। दिल्ली के फुटकर बाजार में गोभी 60 रुपए प्रति किलो में बिक रही है। वहीं शिमला मिर्च 60 रुपए किलो, तोरई 40 रुपए किलो, टिंडा 60 रुपए किलो और करेला व अरबी 80 रुपए किलो मिल रही है। घरों में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों के दाम पर न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार नियंत्रण लगा पा रही है। बढ़े दामों से आम परिवारों का बजट बिगड़ने लगा है।

दिल्ली में दालों की करीब 80 फीसद आपूर्ति विदेशी बाजारों से हो रही है। वहीं थोक मंडियों में दालें इन दिनों मुंबई से आ रही हैं। दालों के दाम भी मुंबई में बैठे व्यापारी ही तय कर रहे हैं। दालों के दाम तय करने में राज्य और केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। देश में दालों की पैदावार लगातार कम हो रही है। लगातार हो रहे घाटे की वजह से किसानों ने दाल की खेती से हाथ खींचना शुरू कर दिया है, जिसका नतीजा यह है कि सिर्फ चने को छोड़कर सारी दालें विदेशों से आ रही हैं। मसूर और मटर की दाल कनाडा से आ रही है। उड़द और अरहर की दाल रंगून से आ रही है। राजमा ज्यादातर चीन से और काबली चना आॅस्ट्रेलिया से आ रहा है। दिल्ली में दालों की चार बड़ी मंडियां लारेंस रोड, भोरगढ़, नरेला और नयाबाजार में हैं। यहां के व्यापारी मुंबई से कच्ची दालें मंगवाते हैं और इन्हें साफ करने के लिए दिल्ली की कई मिलों में भेज दिया जाता है जहां से इन्हें बाजारों में भेजा जाता है। दिल्ली में दाल के थोक व्यापारी पंकज ने कहा कि सरकार को दालों की खरीदारी अपने हाथों में लेनी चाहिए और दालों के दाम खुद तय करने चाहिए।

एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर के व्यापारी नेता राजकुमार भाटिया ने सब्जियों की बढ़ रही कीमतों के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार आए दिन व्यापारियों पर दबाव बनाने के लिए कोई न कोई नया फरमान निकाल देती है, जिसके डर से कोई भी व्यापारी खुलकर व्यापार नहीं कर पाता है। भाटिया ने सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी के लिए परिवहन व्यवस्था को भी जिम्मेदार माना है। उन्होंने कहा कि जगह-जगह बढ़ रहे टोल टैक्स और अन्य तरह के टैक्सों से दिल्ली में माल लाना महंगा हो गया है।

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