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सर्जिकल स्ट्राइक में सेना ने तहस नहस कर दिया था आतंकियों का टेरर कैंप, PoK में 6 महीने बाद उसी अड्डे पर फिर से जुटे आतंकी

उरी के ठीक सामने पीओके में आतंकियों के जिन अड्डे को तबाह कर दिया गया था वहां आतंकियों ने फिर से कब्जा जमा लिया है।
27-28 सितंबर की रात को भारतीय सेना ने पीओके में आतंकी लॉन्‍चपैड पर सर्जिकल स्‍ट्राइक की थी। (फाइल फोटो)

उरी से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सेना के लिए एक चुनौती भरी खबर आई है। खबर है कि सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के जिन लॉन्च पैड को तहस-नहस और बर्बाद कर दिया था, 6 महीने बाद आतंकियों ने पाकिस्तान के सहयोग से उस अड्डे को फिर से आबाद कर लिया है। आतंकी अब वहां डेरा जमाए बैठे हैं और घाटी में बर्फ पिघलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि भारतीय सीमा में घुसपैठ कर सकें। अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सेना के मेजर जनरल आर पी कलिता ने बताया कि उरी के ठीक सामने पीओके में आतंकियों के जिन अड्डे को तबाह कर दिया गया था वहां आतंकियों ने फिर से कब्जा जमा लिया है। मेजर जनरल आर पी कलिता बारामूला में आर्मी के 19वीं डिवीजन का नेतृत्व करते हैं और इनके जिम्मे उरी में 100 किलोमीटर के दायरे में लाइन ऑफ कंट्रोल के हिफाजत की जिम्मेदारी है।

बता दें कि 28-29 सिंतबर की दरमियानी रात को भारतीय सेना के जांबाज सैनिकों की एक टुकड़ी ने पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। भारतीय सेना की इस कार्रवाई में लगभग 30 से 40 आतंकी मारे गये थे और सेना ने तकरीबन 7 आतंकी कैंप को बर्बाद कर दिया था। भारतीय सेना ने ये कार्रवाई उरी में आर्मी बेस पर हुए हमले का बदला लेने के लिए की थी। आतंकियों की इस कार्रवाई में भारतीय सेना के 19 जवान शहीद हो गये थे।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सेना को कुछ समय से ये खुफिया जानकारी मिल रही थी कि सर्दियों में कुछ आतंकी फिर से अपने अड्डे पर लौट आए हैं। मेजर जनरल कलिता ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान जिन जिन जगहों पर सेना ने कार्रवाई की थी वे सभी जगह अब फिर से आतंकी गतिविधियों के लिए सक्रिय हो गये हैं। मेजर कलिता के मुताबिक सेना इस इलाके में 9 से 10 टेरर लॉन्च पैड के बारे में जानती है, इन जगहों पर झोपड़ीनुमा आकृति बनी होती है आतंकी इन जगहों पर जमा होते हैं, अपना हथियार इकट्ठा करते हैं और भारत में घुसने की फिराक में रहते हैं। सेना का कहना है कि अब घुसपैठ के लिए स तैयार आतंकी संचार के आधुनिकतम साधनों से लैस हैं। ये आतंकी अब अपने हैंडलरों से बात करने के लिए मोबाइल और वायरेस रेडियो सेट को ब्लूटूथ के जरिये लिंक कर इस्तेमाल करते हैं। सेना अब इस सिग्नल को कैच करने का तरीका ढूंढ़ रही है।

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