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SP में नेताजी के फैसले को काटने की किसी में नहीं हैसियतः शिवपाल

पार्टी में किसी भी तरह की संवादहीनता से इनकार करते हुए शिवपाल ने कहा ‘‘नेताजी :मुलायम: ने अगर उनको मुख्यमंत्री के तौर पर जनता के बीच पेश किया है तो मुझे स्वीकार है।
Author लखनऊ | September 15, 2016 17:27 pm
कोई नहीं बदल सकता नेताजी का निर्णय

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ तनातनी के पीछे ‘बाहरी’ व्यक्ति की भूमिका की चर्चाओं के बीच उनके चाचा वरिष्ठ काबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने आज कहा कि सभी को जोड़ने से पार्टी को मजबूती मिलेगी और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के फैसले को काटने की हैसियत किसी की नहीं है। शिवपाल ने सपा मुखिया के साथ कल चली मैराथन मुलाकात के बाद लखनऊ लौटने पर संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री से तल्खी के पीछे ‘बाहरी’ व्यक्ति की भूमिका के बारे में पूछने पर कहा कोई सीधा जवाब ना देते हुए कहा ‘‘सबको जोड़ने से ही संगठन को मजबूती मिलेगी। मैंने बहुत पहले से कहा है कि जितने भी लोहियावादी, गांधीवादी और चौधरी चरण सिंह को मानने वाले हैं, वे सब एकजुट हों।’’

सपा के राज्यसभा सदस्य अमर सिंह को वह बाहरी व्यक्ति बताये जाने पर उन्होंने कहा ‘‘नेताजी ने जो भी फैसला किया, किसको पार्टी में शामिल करेंगे, हटाएंगे, किसे जिम्मेदारी देंगे….. उनकी बात काटने की किसी की हैसियत नहीं है। नेताजी ने जो जिम्मेदारी है मुझे स्वीकार है।’ शिवपाल ने कहा कि ‘‘वर्ष 2011 में हम प्रदेश अध्यक्ष थे, तब भी इसी तरीके से मुझे हटाकर अखिलेश को अध्यक्ष बनाया गया था, तब मैंने भी स्वीकार किया था, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मुझे इतनी जल्दी अध्यक्ष बना दिया जाएगा।’

खुद से लोकनिर्माण, राजस्व और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग छीने जाने के बारे में उन्होंने कहा ‘‘मैंने अपने विभागों में पूरा काम कर दिया है। विभागों से बड़ी जिम्मेदारी संगठन की है। चुनाव में सभी कार्यकर्ताओं को लगाना है, फिर से सरकार बनानी है। अब हमारे लिये विभाग जरूरी नहीं हैं। जरूरी यह है कि हमें एक रहना चाहिये, चुनाव का वक्त है। वर्ष 2017 में फिर से सरकार बनानी है।’’

पार्टी में किसी भी तरह की संवादहीनता से इनकार करते हुए शिवपाल ने कहा ‘‘नेताजी ने अगर उनको मुख्यमंत्री के तौर पर जनता के बीच पेश किया है तो मुझे स्वीकार है। पहले भी मैंने स्वीकार किया था।’ पार्टी संविधान में प्रावधान ना होने के बावजूद खुद को पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई का प्रभारी बनाये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा ‘‘नेताजी कोई भी फैसला ले सकते हैं।

बसपा मुखिया मायावती द्वारा पार्टी के प्रमुख नेताओं के बीच तनातनी के बीच सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को सन्यास लेने की सलाह दिये जाने पर शिवपाल ने कहा ‘‘मायावती की राय लेना जरूरी नहीं है। उनकी राय से हमारी पार्टी थोड़े ही चलेगी। वह अपनी राय अपने पास रखें।’’
मालूम हो कि विगत कुछ महीनों से गम्भीर मतभेदों से दो-चार मुलायम परिवार का द्वंद्व गत 13 सितम्बर को उस समय बढ़ गया था, जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया था। सिंघल अखिलेश के चाचा कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी समझे जाते हैं।

जैसे को तैसा की तर्ज पर मुलायम ने बेटे अखिलेश से प्रदेश सपा अध्यक्ष का पद छीनकर शिवपाल को दे दिया, लेकिन कुछ ही घंटों में मुख्यमंत्री अखिलेश ने शिवपाल से लोक निर्माण, सिंचाई और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग छीन लिये थे। मुख्यमंत्री ने कल कहा था कि झगड़ा परिवार का नहीं बल्कि सरकार का है। उन्होंने किसी का नाम लिये बगैर कहा था कि जब ‘बाहरी’ लोग दखलंदाजी करेंगे तो सरकार कैसे चलेगी।

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