January 21, 2017

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केरल: मौलवी ने मुस्लिमों से कहा-अपने बच्चों को आम स्कूलों में न भेजें, दी जाती है इस्लाम विरोधी शिक्षा

अब्दुल मोहसीन अदीद नाम के सलाफी धर्मोपदेशक का कहना है कि मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ने से मुस्लिम बच्चे इस्लाम और अल्लाह से दूर हो जाते हैं और काफिर बन जाते हैं।

केरल के कोझिकोड में एक सलाफी धर्मोपदेशक ने मुख्यधारा के स्कूलों को इस्लाम विरोधी बताते हुए मुस्लिम अभिभावकों से अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में नभेजने की सलाह दी है। (Photo: PTI)

खबर केरल के कोझिकोड की है जहां एक सलाफी (कट्टर इस्लाम का संदेश देने वाला) धर्मोपदेशक ने मुस्लिम अभिभावकों से अपने बच्चों को मुख्यधारा के स्कूलों में नहीं भेजने के लिए कहा है। इस सलाफी धर्मोपदेशक का कहना है कि मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ने से मुस्लिम बच्चे इस्लाम और अल्लाह से दूर हो जाते हैं और काफिर बन जाते हैं। इस धर्मोपदेशक ने मुस्लिम अभिभावकों से बच्चों को अपने घर में ही इस्लामिक तौर तरीकों से शिक्षा देने की सलाह दी है। टाइम्स आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक धर्मोपदेशक के इस संदेश वाला आॅडियो एक इस्लामिक लर्निंग वेबपोर्टल edawa.net पर अपलोड किया गया है।

इस आॅडियो में धर्मोपदेशक कह रहा है, ‘कक्षा दसवीं के जीव विज्ञान की किताब में इंसान के उत्पत्ती के बारे में दो बाते बतायी गई हैं। उसमें लिखा गया है कि इंसान को भगवान ने बनाया जो मात्र एक कल्पना है और दूसरा यह कि हम एप्स से विकसित होकर इंसान बने हैं। किताब में बताया गया है कि हमारे पूर्वज एप्स थे। लेकिन हम आदम के वंशज है।’ इस एक घंटे के आॅडियो में धर्मोपदेशक मुस्लिम अभिभावकों से यह अपील कर रहा है कि वे अपने बच्चों को अल्लाह के दिखाए गए रास्ते पर चलने के लिए बाध्य करें। हालांकि, इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि यह आॅडियो कहा रिकॉर्ड किया गया है। आॅडियो का शीर्षक है ‘वी शुडनॉट लेट देम टेक आॅर चिल्ड्रेन’ मतलब ‘हमें अपने बच्चों को उन्हें नहीं ले जाने देना चाहिए।’

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इस विवादित आॅडियो में अब्दुल मोहसीन अदीद नाम का सलाफी धर्मोपदेशक कुरान की आयतें पढ़ते हुए कहता है, ‘मुसलमानों को अपने बच्चों को उनके बनाए गए नियामों के मुताबिक नहीं चलने देना चाहिए। मुसलमानों को अपने बच्चों को अल्लाह के बताए गए रास्ते पर चलने के लिए कहना चाहिए। हमें पता है कि हमें किस रास्ते पर चलना है। सरकार और पुलिस के पास इस बात का कोई अधिकार नहीं है कि वे हमें बताएं कि हमें अपने बच्चों की परवरिश कैसे करनी है।’ अब्दुल मोहसीन अदीद अपने संदेश में आगे कहता है, ‘हमारे धर्म-पुस्तकों में हमें अल्लाह उनके संदेशवाहक और इस्लाम का सम्मान करने का निर्देश दिया गया है। यदि इस्लाम के रास्ते पर चलना कट्टरता है तो हम कट्टरता के संदेशवाहक हैं। देश ही नहीं पूरा विश्व हमारे खिलाफ हो जाए, लेकिन वे हमें अल्लाह के दिखाए रास्ते पर चलने से नहीं रोक सकते।’

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First Published on October 17, 2016 3:08 pm

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