December 10, 2016

ताज़ा खबर

 

वर्दी में सड़कों पर उतरे पुलिस के जवान, जलाए नेताओं के पुतले, कहा- नक्‍सल समर्थक उन पर आरोप लगाते हैं

साल 2011 में ताड़मेटला गांव में 160 घरों को जलाने के मामले में सीबीआई द्वारा पुलिस को जिम्‍मेदार ठहराए जाने के विरोध में पुलिस ने यह प्रदर्शन किया।

Author रायपुर | October 25, 2016 13:43 pm
छत्‍तीसगढ़ के बस्‍तर में पुलिस ने सोमवार (24 अक्‍टूबर) को प्रदर्शन किया और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं व राजनेताओं के पुतले जलाए।

छत्‍तीसगढ़ के बस्‍तर में पुलिस ने सोमवार (24 अक्‍टूबर) को प्रदर्शन किया और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं व राजनेताओं के पुतले जलाए। साल 2011 में ताड़मेटला गांव में 160 घरों को जलाने के मामले में सीबीआई द्वारा पुलिस को जिम्‍मेदार ठहराए जाने के विरोध में पुलिस ने यह प्रदर्शन किया। राज्‍य के जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बिजापुर, कोंडगांव, सुकमा और नारायणपुर में सहायक आरक्षकों ने सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर, बेला भाटिया और हिमांशु कुमार, राजनेता सोनी सोरी और मनीष कुंजम के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान कई सहायक आरक्षक वर्दी में भी नजर आए। नंदिनी सुंदर ताड़मेटला केस में याचिकाकर्ता हैं। इस केस में सात विशेष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है। पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे हर रोज कठिन परिस्थितियों में लड़ते हैं। ले‍किन ये नक्‍सल समर्थक रोजाना उन पर आरोप लगाते हैं।

Speed News: जानिए दिन भर की पांच बड़ी खबरें:

इन सहायक आरक्षकों में से ज्‍यादातर पहले नक्‍सली थे जो बाद में एसपीओ बन गए थे। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट के सलवा जुड़ुम और एसपीओ पर बैन लगाने के बाद इन्‍हें सहायक आरक्षक दस्‍ते में शामिल किया गया। समस्‍त सहायक आरक्षक की ओर एक पत्र एसपी को दिया गया। इसमें कहा गया, ”नंदिनी सुंदर, हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, सोनी सोरी और मनीष कुंजम नक्‍सल समर्थक हैं। ये लोग पुलिस को बदनाम करते हैं। ताड़मेटला में 76 जवानों की हत्‍या हुई। इसके बाद वहां पर ऑपरेशन चलाया गया। उन्‍होंने कोर्ट को गुमराह किया ताकि नक्‍सली उनका खजाना भरते रहे। कोंडगांव एसपी संतोष सिंह ने कहा कि पुलिस पर आरोपों से कांस्‍टेबल काफी गुस्‍सा हैं। उन्‍होंने बताया, ”वे गुस्‍सा है क्‍योंकि वे हर रोज नक्‍सलियों से लड़ने में अपनी जान जोखिम में डालते हैं। लेकिन सभी तरह के सवालों के जवाब उन्‍हें देने होते हैं। प्रदर्शन करने वाले सहायक आरक्षक हैं। उन्‍हें लगता है कि सबसे ज्‍यादा निशाना उन्‍हें ही बनाया जाता है। यहां तक कि सीबीआई रिपोर्ट में भी उनका नाम है।”

सरेंडर करूंगा बोलकर जीता भरोसा, फिर थाने से AK-47, ग्रेनेड लॉन्‍चर, गोलियां लेकर नक्‍सली फरार

दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर ने बताया कि इससे साफ होता है कि राज्‍य की पुलिस किसी एजेंसी या कोर्ट का सम्‍मान नहीं करती। उन्‍होंने कहा, ”इस तरह के वाकये मुझे मनीष कुंजम जैसे लोगों की सुरक्षा को लेकर डराते हैं। मनीष बिना रूके बस्‍तर के लोगों के लिए काम कर रहे हैं। उन्‍हें सुरक्षा देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दे रखा है लेकिन उनके गनमैन के पास बंदूक ही नहीं है। यह काफी खतरनाक है। ”

गढ़चिरोली में 13 साल में सबसे कम बहा खून: 2015 में नहीं गई किसी जवान की जान, केवल दो नक्‍सली मरे

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 25, 2016 8:24 am

सबरंग