December 05, 2016

ताज़ा खबर

 

उत्तर प्रदेश: फतेहपुर में चल रहीं अवैध शराब की भट्ठियां

अवैध शराब विक्रेताओं के कारण संबंधित इलाकों में आबंटित शराब की सरकारी दुकानों को हर दिन हजारों का नुकसान हो रहा है।

Author फतेहपुर | October 30, 2016 03:02 am
बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी है। (फाइल फोटो)

पुलिस विभाग की मिलीभगत से शराब का अवैध कारोबार ग्रामीणांचलों में भी नहीं बल्कि शहर के कई मोहल्लों में खुलेआम किया जा रहा है। कच्ची शराब के लिए बदनाम गांवों में तो पुलिस इन कारोबारियों पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। इसके अलावा चाय व परचून की दुकानों से अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। सूत्रों के अनुसार अस्ती चौराहा स्थित एक मिष्ठान की दुकान से मिलेट्री की शराब धड़ल्ले से बेची जा रही है।

इन अवैध शराब विक्रेताओं के कारण संबंधित इलाकों में आबंटित शराब की सरकारी दुकानों को हर दिन हजारों का नुकसान हो रहा है। इससे सरकारी दुकानों के अनुज्ञापी बुरी तरह परेशान हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस इन अवैध शराब वालों को पूरी तरह जानने के बाद भी उनके खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं कर रही है। खानापूरी के नाम पर दो चार माह में पांच से दस लीटर शराब की बरामदगी दिखा देती है जबकि ऐसा नहीं है। पुलिस द्वारा बरामद किए जाने वाली शराब से कई गुना शराब प्रतिदिन इस धंधे में लिप्त लोग कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश: गुंडों ने घर में घुसकर पांच लोगों की हत्या की

कच्ची शराब बेचने का काम जोरों से चल रहा है, वहीं शहर में बाराबंकी जनपद से ओपी लाकर बिना होलोग्राम के शराब की बिक्री की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि बगैर नंबर की मारुति से बाराबंकी से लाई गई ओपी की शराब गांव-गांव भेजी जा रही है जो एक हजार रुपए में एक पेटी दी जाती है। बताते हैं कि सरकारी ठेकों में बिकने वाली शराब से कहीं ज्यादा नशा करने के लिए लोग बिना ‘लोगो ग्राम’ वाली इस शराब को धड़ल्ले के साथ पी रहे हैं। यही वजह है कि लोग आबंटित सरकारी दुकनों में जाना उचित नहीं समझते क्योंकि सस्ते दाम पर ज्यादा नशा ही लोगों का शौक है। हालांकि इससे होने वाले नुकसान के बारे में सोचा जाए तो लोग बाराबंकी की ओपी वाली शराब पीकर खुद अपनी जान के दुश्मन बन रहे हैं।

शहर क्षेत्र के कुछ गांवों में कच्ची शराब का धंधा अरसे से चल रहा है। इन क्षेत्रों में आबंटित सरकारी शराब की दुकानों में ज्यादातर सन्नाटा रहता है क्योंकि महुए की शराब का मजा ले चुके ग्रामीण सरकारी ठेका में जाना उचित नहीं समझते। ऐसा नहीं है कि क्षेत्रीय पुलिस दोनों गावों में महुए की शराब उतारने वाले लोगों को नहीं जानती लेकिन समय से चौथ मिलने के कारण पुलिस उन पर हाथ डालकर अपना जेब खर्च कम नहीं करना चाहती। सूत्र बताते हैं कि आबंटित दुकानों को एक ओर जहां महुए की शराब में लिप्त कारोबारी बर्बाद कर रहे हैं वहीं अस्ती चौराहा स्थित एक मिष्ठान की दुकान से मिलेट्री की शराब धड़ल्ले से बेची जा रही है। साथ ही मकानों में कच्ची शराब बेचने का धंधा तेजी से फलफूल रहा है।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 30, 2016 3:00 am

सबरंग