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IIMC में ‘जातिवादी’ टिप्पणी के लिए छात्रों पर की कार्रवाई

संस्थान की जांच समिति ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम के इस छात्र ने आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर फेसबुक पर भड़काऊ और असंसदीय शब्दों वाला पोस्ट डाला था।
Author , नई दिल्ली | March 3, 2016 01:34 am
भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी)

भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी) ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के छात्रों के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘आपत्तिजनक और अपमानजनक’ टिप्पणी करने के लिए अपने छात्रावास से एक छात्र को तीन हफ्तों तक निष्कासित करने का आदेश दिया है।

साथ ही एक दलित छात्र को भी वाट्स ऐप के एक ग्रुप पर संस्थान की एक शिक्षिका के खिलाफ ‘अभद्र और अश्लील भाषा’ के इस्तेमाल के लिए संस्थान के छात्रावास से एक हफ्ते के लिए निष्कासित किया है। यह छात्र पहले मामले के शिकायतकर्ताओं में से एक है। आइआइएमसी सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा संचालित देश का शीर्ष पत्रकारिता संस्थान है। संस्थान ने ‘जातिवादी’ टिप्पणियों का मामला सामने आने के बाद पिछले महीने घटना की जांच का आदेश दिया था और इसके लिए एक जांच समिति का गठन किया था। मंत्रालय ने भी मामले में जांच का आदेश दिया था। घटनाओं को देखते हुए मंत्रालय ने एक सामाजिक मीडिया नीति के निर्माण की सिफारिश की है कि जो क्या करना है और क्या ना करना है इस पर जोर दे और छात्रों-कर्मचारियों के लिए आचार संहिता पर आधारित हो’।

संस्थान की जांच समिति ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम के इस छात्र ने आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर फेसबुक पर भड़काऊ और असंसदीय शब्दों वाला पोस्ट डाला था। आइआइएमसी के उप रजिस्ट्रार पीवी के राजा के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया, ‘मामले पर विचार किया गया और यह महसूस किया गया कि आपने जिस भाषा का इस्तेमाल किया वह आपत्तिजनक और बेहद भड़काऊ, अपमानजनक और असंसदीय थी। इसके कारण आइआइएमसी परिसर में असंतोष और अशांति भी पैदा हुई’।

आदेश में कहा गया, ‘इसलिए आपको तत्काल प्रभाव से छात्रावास से तीन हफ्ते के लिए निष्कासित किया जाता है। इस कारण से आपको भविष्य में सावधान रहना चाहिए’। छात्र ने संस्थान प्रशासन और छात्रावास के वार्डन को पत्र लिखकर उनसे सजा पर पुनर्विचार करने की अपील की है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों सहित कुछ छात्रों के एक समूह ने संस्थान प्रशासन से मामले को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को लेकर उनके विरोध प्रदर्शन करने के बाद उनके कुछ साथी उनके खिलाफ ‘दुर्भावना’ और ‘द्वेष’ फैला रहे हैं।

दूसरा मामला अंग्रेजी पत्रकारिता पाठ्यक्रम के एक दलित छात्र से जुड़ा है। उसने संस्थान की एक वरिष्ठ शिक्षिका के खिलाफ ‘गालियों’ का इस्तेमाल किया था जिसके बारे में पिछली चार फरवरी को शिकायत की गई थी। आदेश में कहा गया, ‘जांच अधिकारी ने छात्र को एक हफ्ते के लिए संस्थान के छात्रावास से निष्कासित करने का दंड देने की सिफारिश की है। मामले पर ध्यान दिया गया और महसूस किया गया कि आपने जिस भाषा का इस्तेमाल किया वह अभद्र, आपत्तिजनक, अश्लील और असंसदीय है’।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मिहिर कुमार सिंह की दूसरी सिफारिशों में एक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ और डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर के पद के गठन सहित भविष्य में इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए संस्थागत तंत्र की स्थापना का प्रस्ताव शामिल है।

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