May 29, 2017

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घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई तो पति ने दिया तीन तलाक, पत्नी बोली-इससे तो हिंदू बन जाना बेहतर

जहां की शादी आसिफ से 12 साल पहले हुई थी और चार साल बाद ही उसने उसे तलाक दे दिया था।

एक वीडियो में शामीम जहां नाम की महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल देने की मांग की है।

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर से तीन तलाक का एक और मामला सामने आया है। महिला ने धमकी देते हुए कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह हिंदू बन जाएगी या खुदकुशी कर लेगी। बुधवार को वायरल हुए एक वीडियो में शामीम जहां नाम की महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल देने की मांग की है। गदरपुर पुलिस थाने के अंदर जहां को उसके पति ने तलाक दे दिया था। एक वीडियो में महिला ने कहा, अपने अनुभव के बाद मैं यहीं कहूंगी कि हिंदू बन जाना ही बेहतर है, क्योंकि वहां एेसी चीजें नहीं होतीं। दूसरा विकल्प खुदकुशी है। मैंने बहुत दुख झेला है।

जहां की शादी आसिफ से 12 साल पहले हुई थी और चार साल बाद ही उसने उसे तलाक दे दिया था। हालांकि घरवालों के समझाने और हलाला का 40 दिनों का समय पूरा होने के बाद दोनों फिर से एक हो गए। इसके बाद आसिफ महिला को मारने-पीटने लगा। घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाते हुए जहां गदरपुर पुलिस थाने पहुंच गई। इसके बाद आसिफ पुलिस थाने आया और उसने पुलिसवालों के सामने ही जहां को तलाक दे दिया।

तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 6 दिनों तक चली इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं। 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) से पूछा था कि क्या महिलाओं को ‘निकाहनामा’ के समय ‘तीन तलाक’ को ‘ना’ कहने का विकल्प दिया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाले पांच जजों के संविधान पीठ ने यह भी कहा था कि क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है।

मंगलवार को एआइएमपीएलबी ने कहा था कि तीन तलाक ऐसा ही मामला है जैसे यह माना जाता है कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे। इसने कहा था कि ये धर्म से जुड़े मामले हैं और इन्हें संवैधानिक नैतिकता के आधार पर नहीं परखा जा सकता। एआइमपीएलबी की ओर से पेश पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, अगर मेरी आस्था इस बात में है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था तो यह आस्था का विषय है और इसमें संवैधानिक नैतिकता का कोई प्रश्न नहीं है और कानून की अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया था कि मुस्लिम समुदाय में शादियां कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होती हैं और महिलाएं अपने हितों और गरिमा की रक्षा के लिए निकाहनामा में विशेष खंड जुड़वा सकती हैं। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने कहा था कि वैवाहिक रिश्ते में बंधने से पहले 4 विकल्प होते हैं, जिसमें शादी को 1954 के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर भी कराया जा सकता है। मुस्लिम बोर्ड ने कहा कि महिलाएं निकाहनामा पर इस्लामी कानून के तहत बातचीत कर सकती हैं। सिर्फ उसके पति को ही नहीं, महिला को भी तीन बार तलाक कहने का हक है और वह डिवोर्स के मामले में काफी ज्यादा राशि की मेहर मांग सकती है।

केंद्र ने सोमवार को न्यायालय से कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को अवैध एवं असंवैधानिक करार देता है तो सरकार मुसलमानों में विवाह और तलाक के नियमन के लिए विधेयक लेकर आएगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह साफ कर दिया था कि वह समय की कमी की वजह से सिर्फ ‘तीन तलाक’ पर सुनवाई करेगा। हालांकि कोर्ट केन्द्र के जोर के मद्देनजर बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ के मुद्दों को भविष्य में सुनवाई के लिए खुला रख रहा है।

इससे पहले 12 मई को हुई सुनवाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था कि एक बार में तीन तलाक देने न केवल इस्लामी शरीयत के खिलाफ है और ये मुस्लिम महिलाओं को जिंदा दफनाने जैसा है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुसलमानों में शादी को खत्म करने का यह तरीका ‘बेहद खराब’ और ‘बर्दाश्त ना करने वाला’ है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर वकील सलमान खुर्शीद ने कहा था कि तीन तलाक कानूनी दखल का मामला नहीं है। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को इसको नकारने का अधिकार मिला हुआ है। उन्होंने कहा था कि महिलाएं निकाहनामा (शादी का कॉन्ट्रेक्ट) दिखाकर तीन तलाक को नकार सकती हैं।

देखें वीडियो ः

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First Published on May 19, 2017 1:45 pm

  1. S
    S.K.JHA
    May 19, 2017 at 3:13 pm
    SARI MUSLIM KANYAYEN HINDU DHARM APNA LE DUNIYAN SE SARE PROBLAM KHTM HO JAYENGE
    Reply

    सबरंग