December 02, 2016

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कभी नक्सलियों के अपहरण के शिकार बने थे तीन बच्चे, अब बनना चाहते हैं नौकरशाह

नक्सली हमसे बर्तन साफ करवाने, कपड़े धोने और खाना पकाने जैसे घरेलू काम जबरन करवाते थे। हमें कभी पैसा नहीं दिया गया और हमें कई दिनों तक भूखे सोना पड़ता था।

Author November 15, 2016 00:45 am
जंगल में चहलकदमी करते नक्सली। (प्रतीकात्मक चित्र)

लातेहर (झारखंड)। झारखंड में नक्सलियों द्वारा भर्ती के लिए अगवा किए गए तीन बच्चे अब स्कूल में पढ़ रहे हैं और उनकी नौकरशाह बनने की आकांक्षा है। लवकेश (12), सीताराम सिंह (12) और जितेंद्र (13) को पिछले साल नक्सलियों ने अगवा कर लिया था और वे उन्हें खाली पेट कठिन प्रशिक्षण दिया करते थे और चाहते थे कि वे उनके सदस्य बन जाएं। जब ये बच्चे विरोध करते थे तब नक्सली उन्हें पीटते थे। वे झारखंड में नक्सल प्रभावित लातेहर जिले के घने जंगलों में मुश्किलों से जूझ रहे थे। खीरखान गांव के निवासी लवकेश ने कहा, ‘जब मुझे मेरे घर के समीप से नक्सलियों ने अगवा किया था तब मैं अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेल रहा था। शुरू में उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जो काम करूंगा, उसके बदले में मेरे गरीब परिवार को पैसा दिया जाएगा। लेकिन कभी भी मेरे माता-पिता को एक भी पैसा नहीं दिया गया।’

लाडी गांव के सीताराम सिंह ने कहा, ‘नक्सली हमसे बर्तन साफ करवाने, कपड़े धोने और खाना पकाने जैसे घरेलू काम जबरन करवाते थे। हमें कभी पैसा नहीं दिया गया और हमें कई दिनों तक भूखे सोना पड़ता था।’ उसने कहा, ‘जब हम इन चीजों की शिकायत करते थे, तो नक्सली बड़ी क्रूरता से हमें पीटते थे और हमारे परिवार का सफाया कर देने की धमकी देते थे।’ लातेहर के पुलिस अधीक्षक अनुप भर्तृहरे ने कहा, ‘चूंकि नक्सली लोगों के बीच बेनकाब होने लगे थे। लोगों ने उनका धन आधारित एजेंडा समझने के बाद उनका समर्थन करना बंद कर दिया। ऐसे में नक्सली कुंठित हो गए।’ भर्तृहरे ने कहा, ‘कुछ मामलों में जो युवक और स्थानीय लोग उनका समर्थन कर रहे थे और कुछ तो उनके साथ भी हो गए, लेकिन उन्हें ही उनका एजेंडा हजम नहीं हुआ, ऐसे में नक्सलियो ने बच्चों का अपहरण करना शुरू कर दिया ताकि वे उन्हें अपनी विचारधारा से प्रभावित कर नक्सली बना पाएं।’

विश्वबंद गांव के निवासी जितेंद्र ने कहा कि वह अपने घर के समीप मवेशी चरा रहा था, उसी दौरान 50-60 लोगों ने उसे अगवा कर लिया। उसने कहा, ‘वे हमें ढंग से सोने या खाने नहीं देते थे, वे करीब करीब रोजाना हमारे साथ मारपीट और गालीगलौज करते थे। हमें करीब एकसाल वहां गुजारना पड़ा जो नरक जैसा था।’ झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान में इन तीनों बच्चों को इस साल नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराया गया जिन्हें नक्सलियों ने अपना दास बना लिया था। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘ये बच्चे अब यहां लातेहर में एक स्कूल में कक्षा चौथी में पढ़ रहे हैं और उनका पूरा खर्च झारखंड पुलिस उठा रही है। वे चौबीसों घंटे स्कूल प्रशासन की निगाहबानी में है और वे छात्रावास में रहते हैं।’

लवकेश ने कहा, ‘यह हमारे लिए पुनर्जन्म जैसा है। हमें मुक्त कराए जाने के बाद हमारा जो भला किया गया, हम उसके लिए पुलिस एवं सरकार के प्रति आभारी हैं। अब हम सभी नौकरशाह बनना चाहते हैं ताकि हम अपने देश की सेवा कर सकें।’ सीताराम ने कहा, ‘हमें नक्सलियों के किसी अभियान या हमलों में शामिल नहीं किया गया क्योंकि वे हमसे ज्यादातर घरेलू कामकाज कराते थे।’ बर्तहारे ने कहा, ‘वैसे तो कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं उपलब्ध है लेकिन माना जाता है कि झारखंड में करीब 30 बच्चे नक्सलियों के कब्जे में हैं। हमें उन्हें शीघ्र ही मुक्त कराने की उम्मीद है क्योंकि पुलिस बल कठिन प्रयत्न कर रही है।’

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First Published on November 15, 2016 12:45 am

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