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न्यायमूर्ति एचएल दत्तू ने कहा- विकास में बाधक हैं जनसंख्या और भ्रष्टाचार

सेमिनार को विश्वविद्यालय के कुलपति रणवीर सिंह ने भी संबोधित किया। उन्होंने चिंता जताई कि आपराधिक अतीत वाले लोगों की संसद में आमद लगातार बढ़ रही है।
Author नई दिल्ली | August 20, 2016 04:34 am
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एचएल दत्तू

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एचएल दत्तू मानते हैं कि भारत के विकास के लिए सुशासन की राह में बढ़ती आबादी और भ्रष्टाचार दो बड़ी बाधाएं हैं। सूचना के अधिकार के कानून और डिजिटल इंडिया अभियान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता लाने की गति इनसे बढ़ी है और साधारण भ्रष्टाचार से लड़ना आसान हुआ है। पर गहरा संगठित राजनीतिक और तंत्र का भ्रष्टाचार देश को अपंग बना सकता है।

सुशासन, विकास और मानवाधिकार विषय पर आयोजित दो दिन के राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए शुक्रवार को न्यायमूर्ति दत्तू ने यह बात कही। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के नई दिल्ली स्थित परिसर में उसके सहयोग से आयोग द्वारा यह सेमिनार आयोजित किया गया है। न्यायमूर्ति दत्तू की नजर में भ्रष्टाचार से लड़ने का सवश्रेष्ठ तरीका यह है कि सरकारें खुद को भ्रष्टाचार और घूसखोरी से मुक्त करें। लोकतंत्र की अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए।

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार जटिल तरीके से सरकारी बजट से धन को दूसरी दिशा में प्रवाहित करता है। जबकि इसका उपयोग सभी मानवाधिकारों को पूरी तरह अमल में लाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दानव के खात्मे के लिए ज्यादा प्रभावी समाधानों की खोज के लिए हमें और छानबीन व अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए। दक्षता के अधिकतम मानक को हासिल किए बिना देश के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 17 नए टिकाऊ विकास मानकों को हासिल करना संभव नहीं होगा। उन्होंने साफ किया कि मानवाधिकार आयोग सबके मानवाधिकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए सुशासन की दिशा में प्रतिबद्ध है।

न्यायमूर्ति दत्तू का कहना था कि अगर किसी देश के लोग भ्रष्ट हैं और आबादी बेतहाशा रफ्तार से बढ़ रही है तो ऐसे देश को सुशासन युक्त देश नहीं कहा जा सकता। भ्रष्टाचार आर्थिक बुनियाद को नष्ट करता है और विकासशील देशों की विदेशी निवेश आकर्षित करने की क्षमता को नष्ट करता है। इतना ही नहीं मानवाधिकार को प्रभावित करने वाली लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास में भी यह बाधा डालता है।

सेमिनार को विश्वविद्यालय के कुलपति रणवीर सिंह ने भी संबोधित किया। उन्होंने चिंता जताई कि आपराधिक अतीत वाले लोगों की संसद में आमद लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कोई यह उम्मीद कैसे कर सकता है कि मानवाधिकारों का संरक्षण होगा। कुछ उदाहरण देते हुए उन्होंने समानता के अधिकार, गरिमा, जीवन और स्वतंत्रता को देश में आज भी अनेक लोगों के लिए एक सपना ही बताया। आयोग के संयुक्त सचिव रंजीत सिंह और विश्वविद्यालय के कुलसचिव जीएस वाजपेयी ने भी सेमिनार को संबोधित किया।

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