December 09, 2016

ताज़ा खबर

 

बर्ड फ्लू पर सक्रिय दिल्ली सरकार, हाई कोर्ट ने भी सराहा

दिल्ली में महामारी बनी डेंगू और चिकनगुनियां पर लापरवाही से सबक लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के विकास मंत्री गोपाल राय ने बर्ड फ्लू पर सक्रियता दिखा कर आलोचकों को चौंका दिया है।

Author नई दिल्ली | October 29, 2016 00:57 am

दिल्ली में महामारी बनी डेंगू और चिकनगुनियां पर लापरवाही से सबक लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के विकास मंत्री गोपाल राय ने बर्ड फ्लू पर सक्रियता दिखा कर आलोचकों को चौंका दिया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि सीधे सुप्रीम कोर्ट से बार-बार डांट खाने और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पर जुर्माना लगाने के बावजूद सरकार सक्रिय न दिखती हो। दिल्ली की जो सरकार एक स्कूल के कमरे बनने और फ्लाई ओवर के बनने पर पूरी मीडिया में विज्ञापनों की लाइन लगा दे, वही सरकार महामारी बन चुकी डेंगू-चिकनगुनियां पर जागरूकता में भी राजनीति करने से बाज न आए। इन बीमारियों से त्रस्त राजधानी में चौकसी के लिए उपराज्यपाल ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को विदेश यात्रा बीच में छोड़ कर दिल्ली लौटने को कहा था जिसे उन्होंने नहीं माना और वे अपने तय कार्यक्रम से ही दिल्ली लौटे। तब दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र जैन समेत दो और मंत्री विदेश दौरे पर थे। इसके ठीक विपरित अभी तक बर्ड फ्लू का मनुष्यों पर असर की पुष्टि न होने पर भी विकास मंत्री गोपाल राय ने अपनी तय गोवा की यात्रा को रद्द कर दिया और पहले दिन से ही लगातार चिड़ियाघर, डीयर पार्क, शक्ति स्थल समेत उन जगहों का अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ दौरा कर रहे हैं जहां बर्ड फ्लू से पक्षियों की मौत हो रही है। इस बार दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार की सक्रियता की सराहना की है।


सरकार से लोगों की यही अपेक्षा होती है कि वह लोगों के जानमाल की हिफाजत करे और उनके सुख-दुख में उनके साथ खड़े हो। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि क्या ऐसा कोई बचाव है जिससे बर्ड फ्लू से बचा जा सकता है। डेंगू और चिनगुनियां का असर कुछ सालों में फिर से होता है, यह वैज्ञानिक शोध से साबित हुआ है। इसलिए उसके बचाव की तो पहले से ही तैयारी की जा सकती है जो इस बार नहीं हो पाई। ये दोनों बीमारी मच्छर के काटने से होता है। इसलिए सरकार प्रयास करके मच्छरों को पैदा होने से रोके। नालों की सफाई हो। मच्छर मारने वाली दवा का नियमित छिड़काव हो। दिल्ली में काम करने वाली विभिन्न सरकारी एजंसियों में तालमेल हो। ऐसा न होने से ही इस बार संकट ज्यादा बढ़ा।
वर्ष 1997 में पहली बार दिल्ली ने डेंगू को जाना और झेला। तब दिल्ली में भाजपा की सरकार थी। डा. हर्षवर्धन दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री थे। अब केंद्र सरकार के मंत्री डा. हर्षवर्धन बताते हैं कि कभी लगा ही नहीं कि यह समस्या केवल दिल्ली सरकार की है। दिल्ली पूरी सरकार सक्रिय हो ही जाती थी। हर रोज दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री की अगुआई में दिल्ली के स्वास्थ्य से जुड़े विभागों की बैठक होने लगी थी। उन बैठकों में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग से लेकर दिल्ली में कार्यरत हर सरकारी विभाग सक्रिय किया गया। किसी ने भी अधिकारों का सवाल नहीं उठाया। हर अस्पताल में अलग वार्ड बनाया गया। दिल्ली सरकार के साथ-साथ नगर निगम, केंद्र सरकार, एनडीएमसी, छावनी बोर्ड के स्वास्थ्य विभाग की हर रोज समीक्षा होने लगी। बीमार लोग हुए लेकिन लोगों को लगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है।


कांग्रेस सरकार में लंबे समय स्वास्थ्य मंत्री रहे डा. अशोक कुमार वालिया ने सबसे ज्यादा समय तक इन बीमारियों का मुकाबला किया। उनका कहना था कि कभी भी यह लगा ही नहीं कि इस मुद्दे पर कौन-कौन से विभाग दिल्ली सरकार के अधीन नहीं है। केंद्र सरकार से लेकर नगर निगम, मलेरिया विभाग आदि के अधिकारी कर्मचारी पूरी ताकत से एकजूट होकर काम करते थे। पूरी दिल्ली में हाहाकार मचा हुआ है। लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में भरे पड़े हैं। कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं है। लोग भगवान भरोसे हैं। लगता ही नहीं कि दिल्ली में कोई सरकार है। इस संकट में एक समय ऐसा आया जब दिल्ली सरकार के केवल एक ही मंत्री शहर में थे। सरकारी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं होने से लोग खुद अपने सामर्थ से उपचार करवा रहे हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 29, 2016 12:56 am

सबरंग