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गोरक्षकों पर कार्रवाई करे केंद्र सरकार: येचुरी

राज्यसभा में मंगलवार को तथाकथित गोरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आश्वासन मांगा।
Author नई दिल्ली | August 10, 2016 03:30 am
माकपा नेता सीताराम येचुरी

राज्यसभा में मंगलवार को तथाकथित गोरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आश्वासन मांगा। येचुरी ने गोरक्षा के नाम पर देश में हो रहे हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस क्रम में प्रधानमंत्री के एक हालिया बयान का जिक्र किया।

येचुरी ने प्रधानमंत्री के बयान की तुलना हिंदी फिल्मों के संवादों से करते हुए कहा कि मोदी ने अपने बयान में कहा है कि दलितों पर हमला नहीं करें। माकपा नेता ने कहा कि उनके बयान का क्या यह मतलब है कि गैर दलितों या धार्मिक रूप से अल्पसंख्यकों पर हमले किए जाएं। कहा कि गोरक्षा के नाम पर सबसे पहले अखलाक की मौत हुई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री को सदन में बयान देना चाहिए कि कानून के शासन की रक्षा होगी और उल्लंघन किए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है। शून्यकाल में ही जद (एकी) के अली अनवर अंसारी ने भारतीय महिला बैंक से जुड़ा एक मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अब इस बैंक का नामोनिशान मिटाकर स्टेट बैंक में विलय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बैंक की 104 शाखाओं में 550 कर्मचारी हैं। विलय से न केवल उनकी पहचान खत्म की जा रही है बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के मकसद पर भी ग्रहण लग गया है। कहा कि बैंक के कर्मचारी सरकार से इस बात का आश्वासन चाहते हैं कि स्टेट बैंक में विलय के बाद उनको भी वही वेतन भत्ते मिलेंगे जो स्टेट बैंक के कर्मियों को मिलते हैं।

जद (एकी) के ही शरद यादव ने संवेदनशील सूचना लीक होने और फोन टैपिंग के आरोपों से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ आंतरिक सुरक्षा बल्कि राजनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने किसी कंपनी का नाम लिए बिना कहा कि इस मामले में सिर्फ कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने उपकर (सेस) से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न वस्तुओं पर उपकर एकत्र कर रही है। लेकिन उसका अपेक्षित उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी प्रकार के उपकर को जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए और आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।

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