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जिस भीड़ ने दंगा मचाया उसके गुरु के आगे हुकूमत लेटी हुई थी

संघ जिसे थोपना चाहता था, उसके लिए आप तैयार नहीं थे। इसी ऊहापोह में आपने दो महीने का समय लिया और हरियाणा को जलने के लिए छोड़ दिया।
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर। साल 2015 में सीएम खट्टर ने गौसेवा आयोग का गठन किया था।

दो साध्वियों की 15 साल की हौसले भरी जंग को जब अंजाम पर पहुंचाना था तो सरकार इस कदर नाकाम हुई कि अदालत को कहना पड़ा कि आप देश के प्रधानमंत्री हैं भाजपा के नहीं। जिस भीड़ ने दंगा मचाया उसके गुरु के आगे हुकूमत लेटी हुई थी। और, हाहाकार मचने के बाद एक सामान्य नागरिक क्षेत्र में सेना उतरी। चलिए, अब जबकि कैदी नंबर 8647 जेल की सलाखों के पीछे है, संगीनें झुका दी गई हैं, सेना बैरक में लौट चुकी है और सरकार फिर सरकार जैसी दिखने की अदाकारी में जुट गई है तो जरा असहज सा सवाल पूछ लें कि इस तांडव में जिन 36 लोगों की जानें गई हैं उनकी हत्या की जिम्मेदारी किस तरह तय की जाएगी?  और, अब तो आपके मन की बात हो गई है और हम इंतजार में हैं कि उस पर काम दिखे। मन की बात की ‘आकाशवाणी’ भी चार दिन बाद हुई। जो प्रधानमंत्री बोलने के लिए ही जाने जाते थे अब तो बहुत देर से बोलना उनकी आदत में शुमार है। ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री को बदलने का आपने विचार नहीं किया। लेकिन यह भी सच है कि संघ जिसे थोपना चाहता था, उसके लिए आप तैयार नहीं थे। इसी ऊहापोह में आपने दो महीने का समय लिया और हरियाणा को जलने के लिए छोड़ दिया।

आप जिसे भक्त कह रहे हैं अगर उन्हें हिंदुस्तानी नागरिक भी कहा जाए तो कोई हर्ज नहीं। लेकिन जनाब किसी भी युद्ध के कुछ नियम होते हैं। तो उसी नियम की दुहाई देते हुए सवाल है कि लोगों पर गोली चलाने के आदेश किसने दिए? विभिन्न तरह की रपटें और मौके से मिली तस्वीरें बताती हैं कि उपद्रवियों की छाती और पीठ पर गोली मारी गई। आमतौर पर ऐसे हालात में हिदायत होती है कि पैरों में गोली मारी जाए। लेकिन पीठ में मारी गई गोली क्या बताती है, यह बताने की जरूरत नहीं है। अस्पताल में दाखिल 150 से ज्यादा श्रद्धालु कहते हैं कि हमारी जान बच गई बस यही बहुत है।36 लोगों का खून बहने की नौबत क्यों आई? खास कर तब जब सब कुछ आपको बहुत पहले से पता है। जो ‘सख्ती’ आपने हालात बेकाबू होने के बाद दिखाई, वही पहले दिखाते तो आज भारतीय लोकतंत्र इस तरह लहूलुहान और शर्मसार नहीं दिखता। अब सवाल है कि इसे क्या माना जाए? यह सिर्फ प्रशासनिक असफलता और अकुशलता है या इसके पीछे वह राजनीति है जिसका लक्ष्य भी पूरा होता नहीं दिख रहा है।

भाजपा सरकार ने भक्तों को आश्रम में इकट्ठा होने से रोकने की कोशिश नहीं की। जो भाजपा चुनाव के पहले बाबा से वोटों का फतवा कराने में जुटी थी चुनाव जीतने के बाद वह अपनी पूरी कैबिनेट के साथ बाबा के चरणों में लोटी थी। और, यही भाजपा सरकार फैसले के अंतिम समय तक उम्मीद पाले हुए थी कि उसका यह वोट बैंक बना रहेगा। सूबे के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा बाबा की भक्ति छोड़ने को तैयार नहीं थे और बाबा के अनुयायियों को धारा 144 से छूट देने का खौफनाक बयान दे रहे थे। भक्त पंचकूला की ओर बढ़ रहे थे और शर्मा जी सूचना दे रहे थे कि सूबे के स्कूल तीन दिन तक बंद रहेंगे। इस उपद्रव के हफ्ते भर पहले ही रामबिलास शर्मा बलात्कार के आरोपी बाबा के जन्मदिन पर डेरा गए थे और उन्हें 51 लाख रुपए दिए थे। जरा, इन शिक्षा मंत्री से पूछा जाए कि आज तक उन्होंने प्रदेश के किसी स्कूल को इतनी बड़ी रकम दी है क्या? शिक्षा के नाम पर तो आपका बजट तीन से चार लाख पर हांफने लगता है। और, उन अनिल विज से क्या उम्मीद की जा सकती है जो पिछले साल डेरा को 50 लाख का अनुदान दे चुके हैं। मुसलिम बहनों को तुरंता तीन तलाक से आजादी की खुशी मनाने वाले विज हिंदू बहनों को न्याय मिलने के बाद ट्विटर के खेल-कूद से बचे रहे, इस इंसाफ पर उनकी कोई चहचहाहट नहीं है।

बाबा को सजा होने और लोकतांत्रिक सरकार के शर्मसार होने के बाद भी हरियाणा की भाजपा सरकार का हर मंत्री इस मुद्दे पर इसी उम्मीद में चुप्पी साधे बैठा है कि बाबा के भक्त उसके ही वोट बैंक होंगे। भक्ति का आधार श्रद्धा है और जाहिर सी बात है कि श्रद्धा में बिखराव के बाद यह समूह भी बिखरेगा। इस समूह को अपने पाले में रखने के लालच में ही भाजपा सरकार को इनका खून भी बहाना पड़ा। बहरहाल, तूफान गुजरने के बाद भाजपा अपने कुशल प्रबंधन में जुट गई है और साध्वियों और समाज के कुछ सजग पहरुओं की इस जंग को भी अपने खाते में डालने की कोशिश कर रही है। मध्य प्रदेश में किसानों पर गोली चलने के बाद शिवराज चौहान और हरियाणा में श्रद्धालुओं पर गोली चलने के बाद दोनों सरकारें बेदाग और सुरक्षित हैं। लेकिन आपके प्रबंधन के खेमे से कूद कर यह सवाल तो उछलता ही रहेगा कि इन 36 नागरिकों का कातिल कौन?

कातिल कौन

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  1. M
    Manvendra
    Aug 30, 2017 at 11:57 am
    जब हाईकोर्ट कह रहा है उसने पी एम पर टिप्पणी नही की मीडिया संयम बरते तब सनसनी फैलाना मीडिया का काम कैसे हो गया ?इन हत्याओ का कातिल भाजपा सरकार की बजाय कार्यपालिका को निर्देश देने वाले व गुरमीत का आभा मण्डल बनाने वाले हैं ? जब यह व्यक्ति कांग्रेस के पक्ष में फतवा दे रहा था तब पूज्य था । भाजपा के पक्ष में होते ही खूंखार अपराधी ? मीडिया को आत्म विश्लेषण की आवश्यकता है । माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रकाश सिंह समिति की रिपोर्ट लागू कर पुलिस ढांचा में आमूलचूल परिवर्तन समीचीन होगा । हरियाणा की भाजपा सरकार ने नही किया इसलिए वो गुनाहगार हैं तो अन्य राज्य सरकारें भी गुनाहगार हैं?
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    सबरंग