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अब तक नहीं लौटी रौनक, वीरान हुआ डेरा सच्चा सौदा का सिरसा मुख्यालय

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम सिंह को साध्वी यौन शोषण केस में सीबीआइ की विशेष अदालत द्वारा 20 साल की सजा सुनाने के बाद डेरा एकदम सुनसान हो गया है।
Author August 31, 2017 10:06 am
देश-विदेश में उनके पांच करोड़ से अधिक समर्थक हैं, मगर आज हालात ऐेसे हो गए हैं कि इतने समर्थक होने के बावजूद डेरा का सिरसा मुख्यालय वीरान हो गया है।

डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रबंधकों का दावा है कि देश-विदेश में उनके पांच करोड़ से अधिक समर्थक हैं, मगर आज हालात ऐेसे हो गए हैं कि इतने समर्थक होने के बावजूद डेरा का सिरसा मुख्यालय वीरान हो गया है। डेरे की सड़कें, अस्पताल, शिक्षण संस्थान, होटल, कैंटीन और मॉल समेत सभी डेरा स्थलों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम सिंह को साध्वी यौन शोषण केस में सीबीआइ की विशेष अदालत द्वारा 20 साल की सजा सुनाने के बाद डेरा एकदम सुनसान हो गया है। हालांकि डेरे के अंदर तो जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है, मगर डेरा के आसपास भी पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है।
डेरे की तरफ जाने वाला रास्ता सुनसान है। वहां आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए बनाई गई पार्किंग में कोई नजर नहीं आया। डेरा का माही सिनेमा हॉल,अस्पताल, शिक्षण संस्थान, होटल, रेस्तरां, पुलिस नाका सभी पर ताले लगे हुए हैं। यहां तक की डेरे का गेट भी बंद पड़ा है। कहा जा रहा है कि डेरे के अंदर कुछ सेवादार, बुजुर्ग लोग ही हैं। उनके पास दूसरी जगह जाने का कोई विकल्प नहीं होने की वजह से वे डेरे में ही रुके हुए हैं।

सेना का पहरा कायम
सिरसा शहर में लगाया गया कर्फ्यू भले ही हटा दिया है, लेकिन डेरे की ओर कर्फ्यू है। सेना पूरी मुस्तैदी के साथ डटी हुई है। डेरे की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के अलावा नेजिया के पास भी सेना ने डेरा जमाया हुआ है। वहां से गुजरने वाले वाहनों की गहन जांच की जा रही है। यहां तक की दूध वालों के ड्रम भी चेक किए जा रहे हैं। अब शहर के में एक ही चर्चा है कि सेना डेरे में कब जाएगी। लोगों को लगता है कि जब सेना डेरे की तलाशी लेगी तो अंदर छिपे हुए कई राज उजागर होंगे।
गांवों में सामान्य हो रहा है जनजीवन
डेरा विवाद की वजह से डेरा के आसपास आबाद गांवों व ढाणियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई थी। हालांकि नेजिया के ग्रामीणों ने कहा कि वे न तो पहले कभी डरते थे और न ही अब डरते हैं। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि बाबा को जो सजा मिली है, वह सही है। इनमें कुछ ऐसे ग्रामीण भी थे जो डेरे को मानते हैं।
उनका कहना था कि वे शाह मस्ताना महाराज व शाह सतनाम सिंह को अपना गुरु मानते हैं, वे गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना गुरु नहीं मानते। इसलिए डेरे के प्रति उनकी आस्था है, लेकिन गुरमीत राम रहीम सिंह के प्रति नहीं। इसलिए उन्हें कोई डर-भय नहीं है। अब गांवों में जनजीवन सामान्य हो रहा है।
कर्फ्यू में दो घंटे की ढील
जिलाधीश प्रभजोत सिंह ने बताया कि सिरसा शहर में लगाए गए कर्फ्यू को पूरी तरह से हटा दिया गया है, लेकिन शाह सतनाम सिंह चौक से नेजियाखेड़ा टी प्वाइंट तक, कंगनपुर रोड व नेजियाखेड़ा टी प्वाइंट से बाजेकां रेलवे क्रॉसिंग तक कर्फ्यू रहेगा। हां, प्रशासन ने बुधवार को उक्त क्षेत्रों में लगाए गए कर्फ्यू में शाम 4 बजे से 6 बजे (2 घंटे) तक ढील दी।

वीरान हुआ डेरा सच्चा सौदा का सिरसा मुख्यालय

सिरसा शहर में लगे कर्फ्यू मे मंगलवार को ढील देने के बाद बुधवार को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया, लेकिन उसके बावजूद सिरसा शहर की रौनक नहीं लौटी है। दूसरे दिन भी विभिन्न सरकारी व निजी कार्यालयों सहित स्कूल, कॉलेज तथा बाजार में दुकानों को खोलकर अधिकारी, कर्मचारी व दुकानदार पहुंचे, लेकिन उसके बावजूद काम करवाने वालों, विद्यार्थियों तथा दुकानों पर ग्राहकों की संख्या नाममात्र की दर्ज की गई। अभी भी लोग विशेषकर ग्रामीण अंचल के लोगों में डेरा समर्थकों का भय है, जिसकी वजह से वे शहर की तरफ रुख ही नहीं कर रहे हैं। बुधवार को लघु सचिवालय में पूर्व की भांति सभी कार्यालय खुले, ई-दिशा केंद्र में भी कर्मचारी आए, लेकिन काम करवाने के लिए आने वाले लोगों की संख्या इक्का-दुक्का ही दिखाई दी।

वहीं स्कूल व कॉलेजों में भी पढ़ाने के लिए पूरा स्टाफ आया, लेकिन यहां विद्यार्थी भी भय के मारे नहीं आए या उनके अभिभावकों ने नहीं भेजा। बाजार की बात करें तो मंगल और बुधवार को पूरे दिन दुकानें खुली रहीं, लेकिन दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे या किसी एक दुकान में एकत्रित होकर डेरा प्रकरण की चर्चा करते रहे। केवल किराने से संबंधित दुकानों पर ही ग्राहक ज्यादा दिखाई दिए। की संख्या अधिक देखी गई, अन्यथा कपड़ों, क्रॉकरी, जूतों, फर्नीचर, स्टेशनरी, हार्डवेयर से संबंधित दुकानों में इक्का-दुक्का ग्राहक हीखरीददारी करने के लिए आया।

 

 

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