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हरियाणा: ठोस विकल्प न होने के कारण प्रदेश की राजनीति फिर उन्हीं चेहरों के इर्द-गिर्द

प्रदेश के लोगों ने कई बार विकल्प के अभाव में मजबूरी की सरकार बनाई है।
Author August 31, 2017 04:37 am
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर। (फाइल फोटो)

चुनावी राजनीति में बेहतर विकल्प नहीं होना संकट

हरियाणा की राजनीति के प्रबुद्ध जानकार एवं राजनीतिक विश्लेषक डॉ.सतीश त्यागी का मानना है कि लोग इन घटनाओं को याद तो रखते हैं लेकिन पांच साल बाद होने वाले चुनाव में कोई ठोस विकल्प न होने के कारण प्रदेश की राजनीति फिर उन्हीं चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। डॉ. त्यागी के अनुसार जब देश में आपातकाल लागू हुआ तो समूचे देश में एक नारा दिया गया था। इसके बावजूद आपातकाल के बाद बंसीलाल सरकार की वापसी तथा महम कांड के बाद चौटाला सरकार की सत्ता में वापसी तथा भजनलाल द्वारा आया राम गया राम की राजनीति को जन्म देने के बावजूद सत्ता में आना इस बात का संकेत है कि प्रदेश के लोगों ने कई बार विकल्प के अभाव में मजबूरी की सरकार बनाई है। दूसरी तरफ हरियाणा के राजनीतिक मुद्दों के लेखक ईश्वर धामू यह मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं चंद रोज के लिए होती हैं लेकिन इनका असर लंबे समय के लिए रहता है। पहले जाट आरक्षण आंदोलन और अब गुरमीत राम रहीम के घटनाक्रम के कारण हरियाणा का जो आर्थिक व सामाजिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में काफी समय लगेगा।

अपना नुकसान झेलकर जवानों को बचाया

गांव बेगू का वह किसान हीरो है, जिसने अपना नुकसान तो झेला लेकिन कई जिंदगियां बचाने में कामयाबी हासिल की। डेरे के अनुयायी 133 केवी बिजलीघर को फूंक रहे थे, तब यहां पर हरियाणा पुलिस के 15 जवान तैनात थे। इन जवानों ने भीड़ को जब तक हो सका, रोका। लेकिन आगजनी पर उतारू भीड़ के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा। इन पुलिस जवानों ने खेत के रास्ते जान बचाने के लिए दौड़ लगाई। लेकिन गुस्साई डेरा प्रेमियों की भीड़ ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। ऐसे में बेगू का किसान अमरजीत सिंह अपने खेत में स्पे्र कर रहा था, पुलिस की पुकार पर उसने अपने ट्रेक्टर पर उन्हें गांव पहुंचाया और गांव में मुनादी करवा दी, जिससे ग्रामीण एकत्रित हो गए और दंगाइयों की हिम्मत टूट गई। अमरजीत की सूझबूझ और साहस के कारण पुलिस जवानों की जान बच पाई लेकिन गुस्साई भीड़ ने उसका ट्यूबवेल फूंक दिया और फसल को भी नुकसान पहुंचाया।

 

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