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कैश के लिए रोते हुए जिस रिटायर फौजी की तस्वीर हुई थी वायरल उन्होंने कहा- किसी की भीख नहीं चाहिए, पेंशन मिलती है

कैश के लिए रोते हुए पूर्व सैनिक नंदलाल की तस्वीर काफी वायरल हुई थी।
यह तस्वीर गुरुग्राम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की न्यू कॉलोनी ब्रांच के बाहर की है।

कैश के लिए बैंक की लाइन में खड़े जिस रिटायर फौजी की रोते हुए तस्वीर वायरल हुई थी, उनकी मदद के लिए लोग आगे आने लगे हैं। लेकिन पूर्व सैनिक नंदलाल ने सभी की मदद ठुकराते हुए कहा कि उन्हें पेंशन मिलती है, किसी के पैसे की जरूरत नहीं है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वक्त सेना में शामिल हुए नंदलाल का कहना है कि बस उन्हें बैंक से पेंशन निकालने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने नंदलाल के हवाले से लिखा है, ‘मुझे पेंशन मिलती है, मुझे किसी के पैसे की जरूरत नहीं है। किसी की भीख नहीं चाहिए, मुझे मेरे पैसे निकालने दीजिए।’

तस्वीर के वायरल होने के बाद उनकी मदद के लिए समाज के हर तबके से लोग आगे आए। उनके रिश्तेदार भी उनके किराए के घर में उनके हालचाल लेने के लिए पहुंचने लगे। लोगों ने उनकी मदद करने की बात कही, लेकिन नंदलाल ने किसी की भी मदद लेने से इनकार कर दिया।

उनके किराए के कमरे पर उनसे मिलने पहुंचे उनके भतीजे के हवाले से एचटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘उन्हें पेंशन मिलती है। उनकी बेटी भी पैसा भेजती है। उनके पास पैसों की कमी नहीं है।’ कई लोगों ने नंदलाल का जिस बैंक में अकाउंट से वहां से उनके अकाउंट की जानकारी मांगी है, ताकि उनके अकाउंट में ऑनलाइन पैसे भेजे सकें।

हिंदुस्तान टाइम्स ने नंदलाल की तस्वीर बुधवार को प्रकाशित की थी। तस्वीर में नंदलाल बैंक के बाहर लाइन में खड़े हुए रो रहे थे। वे कैश निकालने के लिए तीन दिन से बैंक के बाहर लाइन में लगे थे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। आखिर में वे टूट गए और लाइन में खड़े-खड़े ही रोने लगे। अखबार ने इस तस्वीर का कैप्शन दिया था, ‘उन्होंने तो कहा था केवल अमीर रोएंगे।’ यह तस्वीर इंटरनेट पर काफी वायरल हुई थी। इस तस्वीर के जरिए लोगों ने पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले पर निशाना साधा था।

नंदलाल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के वक्त बतौर नायक सेना के साथ जुड़े थे। उसके दो दशक के बाद 1991 में वे सेना से रिटायर हो गए। तीन दशक पहले नंदलाल की पत्नी की मौत हो गई थी। उन्होंने एक बेटी को गोद लिया था। बेटी की करीब 15 साल पहले शादी कर दी थी। अब बेटी फरीदाबाद में रहती हैं। अपनी शादी के बाद बेटी ने नंदलाल का घर भी बेच दिया था। जिसके बाद वे 10*10 फीट के किराए के कमरे में रहने के लिए मजबूर हैं।

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  1. A
    Abu talib
    Dec 17, 2016 at 11:41 am
    मेरी पुरानी ग़ज़ल का एक शेर है ,हक़ को ताख़ीर करके भीक किया,फिर सखावत पे फख्र करने लगे !
    Reply
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