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हरियाणा: पहले भी हुए कई बडे़-बड़े कांड, हिंसा से सबसे ज्यादा मौतें सीएम खट्टर के खाते में

हरियाणा में चाहे भजनलाल, बंसीलाल की सरकार रही हो या चौटाला व हुड्डा की, हर सरकार ने किसी न किसी तरह के विवादों के बीच जनता में अपनी फजीहत करवाई है और खामियाजा आम लोगों ने भुगता है।
Author August 31, 2017 04:23 am
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर। (फाइल फोटो)

संजीव शर्मा

डेरा सच्चा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेल में भेजने की कीमत 38 बेगुनाहों ने जान देकर चुकाई है। इस पूरे प्रकरण की चौतरफा आलोचना हो रही है। लोकतंत्र के चारो स्तंभ बाबा के कारनामों और सरकार की उसको बचाने की नीतियों के खिलाफ खड़े हुए, तब जाकर खूनखराबा रुक पाया। दिलचस्प यह है कि इस तरह के कांड सिर्फ खट्टर सरकार के कार्यकाल में नहीं हुए बल्कि अब तक राज्य में रहे हर मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुए हैं जो न केवल देश में बल्कि विदेशी अखबारों में भी सुर्खियां बनते रहे हैं। हरियाणा में चाहे भजनलाल, बंसीलाल की सरकार रही हो या चौटाला व हुड्डा की, हर सरकार ने किसी न किसी तरह के विवादों के बीच जनता में अपनी फजीहत करवाई है और खामियाजा आम लोगों ने भुगता है। हरियाणा में बीते वक्त में हुआ कंडेला कांड हो या महम कांड, सरकारों की बचाव की नीतियों के कारण खून आम लोगों का ही बहा है…

बंसीलाल की शराबबंदी व रिवासा कांड ने मचाया था हड़कंप

हरियाणा की राजनीति में कठोर प्रशासक के रूप में जाने गए पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल का कार्यकाल भी विवाद से अछूता नहीं रहा। वर्ष 1968 से 1975 तक बंसीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे। बंसीलाल के बेटे दिवंगत सुरेंद्र सिंह छात्र राजनीति में सक्रिय थे। सुरेंद्र सिंह की राजनीति में एक नौजवान भैरों सिंह आडेÞ आ रहा था। पुलिस ने भैरों सिंह पर शिकंजा कसते हुए उसकी मां व मामा को गिरफ्तार कर लिया। मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस ने सभी सीमाएं लांघते हुए भैरों सिंह की मां और मामा को निर्वस्त्र करके एक ही हवालात में बंद कर दिया। उस समय यह मामला राष्टÑीय व अंतरराष्टÑीय स्तर पर उछला था। इसके बाद बंसीलाल ने अपनी पार्टी बनाकर सत्ता में आए तो उन्होंने शराबबंदी कर डाली। शराबबंदी के समय हरियाणा में पनपा शराब माफिया आज भी चर्चा में है।

भजनलाल सरकार में सुशीला कांड पर लिखी गई थी किताब

पूरे देश में आया राम गया राम की राजनीति को जन्म देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल प्रदेश के ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनके कार्यकाल में कई ऐसी घटनाएं हुई जिनकी बदौलत सरकार कई बार संकट में आई। भजनलाल सरकार के कार्यकाल में महिला अध्यापिका सुशीला का प्रकरण बेहद सुर्खियों में आया था। सुशीला संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। बाद में उसकी लाश मिली थी। इस मामले में विपक्षी दलों तथा आम लोगों ने भजनलाल सरकार को कई माह तक घेरा था। इसके बाद भजनलाल सरकार में हुए निसिंग गोलीकांड व कादमा कांड में किसानों की मौत ने सरकार की चूलें हिलाकर रख दी थीं।

आज भी गूंजते हैं चौटाला कार्यकाल के महम, दुलीना व कंडेला कांड

पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की गिनती उन नेताओं में होती है जिन्होंने हरियाणा में दबंगता के साथ राज किया है। चौटाला तो जेबीटी भर्ती घोटाले में आज जेल में हैं लेकिन उनकी पार्टी के विधायकों को आज भी हरियाणा विधानसभा में उनके कार्यकाल के दौरान हुए दुलीना व कंडेला कांड के कारण शर्मिंदगी झेलनी पड़ जाती है। चौटाला सरकार के कार्यकाल के दौरान झज्जर जिले के गांव दुलीना में मवेशियों की खाल उतारने को लेकर हुए विवाद में भीड़ ने कई लोगों को पीट-पीट कर मार दिया था। इसके बाद चौटाला सरकार में ही जींद जिले के गांव कंडेला में किसानों पर लाठीचार्ज व गोली चलाने की घटना में कई मारे गए थे। इन दो घटनाओं ने चौटाला की साख पर बट्टा लगा दिया था। इसके अलावा चौटाला सरकार में हुआ महम कांड आज भी हरियाणा के बच्चे-बच्चे की जुबान पर है।

गोहाना कांड से हुई थी हुड्डा सरकार की शुरुआत

लगातार दस वर्ष तक हरियाणा में सत्ता संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने वर्ष 2005 में सत्ता संभाली तो गुरुग्राम स्थित मारुति कंपनी के कर्मचारियों पर लाठीचार्ज व आगजनी की घटना हो गई। यह घटना इतनी बढ़ी की मारुति ने गुरुग्राम से अपनी एक इकाई बंद करने का भी फैसला कर लिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हस्तक्षेप करके विवाद सुलझाया। हुड्डा के प्रथम कार्यकाल में हुआ गोहाना कांड आज भी लोगों को याद है। हुड्डा के दूसरे कार्यकाल में मिर्चपुर समेत प्रदेश में हुई दलित उत्पीड़न की घटनाओं ने जहां हुड्डा विरोधियों को दिल्ली दरबार में सक्रिय कर दिया था वहीं सोनिया गांधी को खुद हुड्डा का बचाव करना पड़ा था। दलित उत्पीड़न की कई घटनाएं लंबे समय तक राष्टÑीय व अंतरराष्टÑीय मीडिया में छाई रही थीं।

खट्टर के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर हिंसा

हरियाणा में अब तक सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्रियों में से कोई भी ऐसा नहीं है, जिसके कार्यकाल में कोई बड़ा हादसा न हुआ हो। पूर्व मुख्यमंत्रियों तथा वर्तमान मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुए हादसों में कई तरह से भिन्नता है। लेकिन मनोहर सरकार के कार्यकाल में राज्य में अब तक हुई हिंसा की घटनाओं में सर्वाधिक लोगों की जान गई है। यह अपने आप में रेकॉर्ड है। इससे पहले की सरकारों में हुई हिंसा में इतने बड़े स्तर पर जानी नुकसान कभी नहीं हुआ था।

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